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श्रेष्ठ संतान का निर्माण पूरे परिवार की जिम्मेदारी: डॉ. गायत्री शर्मा

जयपुर। अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज हरिद्वार के आओ गढ़े संस्कारवान पीढ़ी अभियान के अंतर्गत गायत्री परिवार राजस्थान जोन की ओर से गर्भवती महिलाओं के लिए नौ दिवसीय दिव्य गर्भोत्सव निशुल्क ऑनलाइन शिविर शुक्रवार को शुरू हुआ। ब्रह्मपुरी स्थित गायत्री शक्तिपीठ में दीप प्रज्जवलन के साथ शिविर की शुरुआत हुई। गायत्री शक्तिपीठ के व्यवस्थापक रणवीर सिंह चौधरी, जयपुर समन्वयक ओमप्रकाश अग्रवाल एवं अन्य ने वेदमाता गायत्री और गुरूसत्ता के समक्ष गायत्री मंत्र के साथ दीप प्रज्जवलन किया। दोपहर तीन से चार बजे तक विषय विशेषज्ञों के प्रेरक उद्बोधन हुए। पहले दिन शांतिकुंज हरिद्वार से गायत्री शर्मा ने गर्भ का ज्ञान-विज्ञान विषय पर कई सार्थक और प्रभावी जानकारी दी। चार से साढ़े चार बजे तक प्रश्नोत्तरी सत्र हुआ। जिसमें महिलाओं ने प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासा शांत की।

आओ गढ़े संस्कारवान पीढ़ी कार्यक्रम

अखिल विश्व गायत्री परिवार के आओ गढ़े संस्कारवान पीढ़ी कार्यक्रम की केन्द्रीय संमन्वयक डॉ. गायत्री शर्मा ने कहा कि आज दुनिया में बड़े आदमियों की तो बाढ़ आई हुई है मगर महामानवों का अकाल पड़ा हुआ है। महामानव वह जिसका चरित्र उज्जवल है, जो दूसरों के लिए जीता है। ऐसे महामानवों का निर्माण होगा तभी समाज और राष्ट्र की वास्तविक उन्नति होगी। गायत्री परिवार का आओ गढ़े संस्कारवान पीढ़ी कार्यक्रम इसी उद्देश्य को लेकर चलाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि विज्ञान भी स्वीकार करता है कि बच्चा पैदा होने के साथ 80 प्रतिशत ज्ञान लेकर आता है, वह ज्ञान अपनी मां और आसपास के वातावरण से सीखता है। बच्चे के मस्तिक का 90 प्रतिशत सुप्त होता है उसमें पूर्व जन्म की स्मृतियां होती है। गर्भवती माता की जिम्मेदारी है वह अपनी भावी संतान के अचेतन मस्तिष्क में भरी पड़ी स्मृतियों को मिटाएं। श्रेष्ठ संतान पैदा करने की जिम्मेदारी केवल मां की नहीं, वरन् पिता और परिवार के सभी सदस्यों की है। उन सबकी जिम्मेदारी है कि वे गर्भवती महिला को अच्छा भोजन और वातावरण उपलब्ध करवाएं।

उन्होंने प्रोजेक्टर के माध्यम से विषय को सरलता समझाया। वीडियो के माध्यम से गर्भस्थ शिशु की हलचलों से रूबरू करवाया कि किस प्रकार स्वस्थ वातावरण में पलने वाला बच्चा खुशमिजाज और घुटन और डर वाले माहौल में पल रहा बच्चा गर्भ में सिकुंड़ा हुआ रहता है।

वैज्ञानिक शोध को आधार

डॉ. गायत्री शर्मा ने कहा कि आज विदेशी वैज्ञानिक भी भारतीय ऋषियों की परंपरा का पूर्ण समर्थन कर रहे है। इन दिनों यंत्र उपकरणों और विविध गतिविधियों के माध्यम से गर्भिणी के आवेग-संवेग का शिशु पर स्पष्ट प्रभाव देखा जा सकता है। शोधकर्ताओं ने गर्भिणी के साथ किए गए व्यवहार अथवा सुख-दुख की परिस्थितियों में शिशु को प्रतिक्रिया व्यक्त करते देखा है। अनेक देशों में इस वैज्ञानिक शोध को आधार बनाकर इच्छित संतति प्राप्त करने के लिए तंत्र खड़े किए गए हैं। गायत्री परिवार राजस्थान जोन प्रभारी जयसिंह यादव ने बताया कि 26 जून को अलवर की डॉ. सरोज गुप्ता गर्भवती माता की आदर्श जीवनचर्या और उसका गर्भस्थ शिशु पर प्रभाव पर उद्बोधन देंगी। जोन समन्वयक सुशील शर्मा ने कार्यशाला का संचालन किया।

गर्भवती महिला क्या करें

1. अपनी दिनचर्या व्यवस्थित रखें।
2. संतुलित और पौष्टिक भोजन ग्रहण करें।
3. योग-व्यायाम और प्राणायाम करें।
4. प्रतिदिन श्रेष्ठ साहित्य का अध्ययन करें।
5.गर्भस्थ शिशु से संवाद करें।
6. दोपहर दो घंटे आराम करें।
7. प्रतिदिन कुछ ऐसी गतिविधियां करें जिसका सकारात्मक प्रभाव गर्भस्थ शिशु पर पड़े।

ये कार्य बिल्कुल नहीं करे

1. उदास, निराश नहीं रहे, क्रोध नहीं करें।
2. पूरा दिन आराम में नहीं बिताए
3. कोई भी बुरा व्यसन नहीं करें।
4. मोबाइल-टीवी को ज्यादा समय नहीं दे।

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