जयपुर। जयपुर की दीया शर्मा के ओजस्वी बाल स्वर में गाया ‘ जय -जगत ‘ गीत विनोबा विचार के लिए समर्पित राष्ट्रीय फलक के अपने यूट्यूब चैनल पर बिहार के सर्वोदयी विचारक अव्यक्त और मनीषा ने साझा किया है। दीया शर्मा के भावमय स्वर में यह गीत अब पूरे देश में गूंजेगा।
भारतीय विघा भवन, जयपुर की कक्षा आठ की छात्रा दीया शर्मा ने यह गीत आचार्य विनोबा भावे की पुण्यतिथि ( 15 नवंबर) पर विनोबा विचार मंच, जयपुर के आग्रह पर गाया था। जयपुर की दो अन्य बालिकाओं झनक और वैदेही ने भी यह गीत गाकर इसका वीडियो बनाकर हम तक भेजा। उदयपुर जिले के अरावली अंचल के सवना गांव में स्कूली बच्चों ने अपनी प्रधानाचार्य एवं प्रसिद्ध साहित्यकार ज्योत्सना सक्सेना जी के मार्गदर्शन में विनोबा की पुण्यतिथि पर पूरे गांव में प्रभात -फेरी निकाल यह गीत गाया था।
इन बालिकाओं और सवना गांव के सरकारी स्कूल के बच्चों के स्वर में ‘ जय -जगत ‘ गीत के वीडियो विनोबा के पवनार आश्रम ( वर्धा, महाराष्ट्र ) में भी वयोवृद्ध सर्वोदयी विचारक बाल विजय भाई और कालिन्दी ताई के सम्मुख सुनाये जा चुके हैं। सद्भावना, प्रेम, शांति, अहिंसा का पैगाम देने वाले ‘ जय -जगत ‘ गीत की रचना गुजरात के जनकवि दुखयाल ने की थी जो विनोबा भावे के अनुयायी थे। डॉ. एस.एन. सुब्बाराव जी ‘ भाईजी ‘ के क्रांतिमय स्वर में यह गीत पूरे देश में फैला।
आचार्य विनोबा भावे ने अपनी ‘ भूदान यात्रा ‘ के दौरान एक नवंबर, 1957 को कर्नाटक में ‘ जय -जगत ‘ मंत्र का उद्घोष दिया था। विनोबा जी ने कहा था कि ‘ वसुधैव कुटुम्बकम् ‘ भारतीय संस्कृति का प्रमुख तत्व है। तत्पश्चात ‘ जय -जगत ‘ मंत्र सर्वोदयी विचार का जयघोष बन गया। गांधीजी के महान् शिष्य विनोबा ने सर्वोदय के साथ पूरी दुनिया को भारत की आध्यात्मिक, सामाजिक, नैतिक शक्ति और ग्राम स्वराज्य एवं खादी-ग्रामोघोग के सामर्थ्य से अपने अनूठे स्वरूप में परिचित कराया।
बालमन में गांधी-विनोबा के संस्कारों को आत्मसात करने वाली दीया शर्मा का परिवार इन महापुरुषों के विचार दर्शन से अनुप्रेरित है। दीया राजस्थान के जाने -माने टीवी पत्रकार और प्रखर राजनीतिक विश्लेषक योगेश शर्मा जी की पुत्री हैं। दीया के दादा और पूर्व मंत्री स्व. चंद्रशेखर जी शर्मा ( बांदीकुई) अपने दौर में कांग्रेस पार्टी के अदम्य ऊर्जावान राजनेता थे।
विनोबा विचार मंच का संकल्प है कि विनोबा विचार साहित्य और ‘ जय -जगत ‘ गीत का युवा और बाल पीढ़ी में प्रसार हो। इससे इनके मन -मानस में गांधी -विनोबा विचार जहाँ अंकित होंगे, वहीं समाज में सद्भावना, सत्य, अहिंसा, मैत्री, मानवता का संदेश दूर तक फैलेगा।
