जयपुर। शिक्षकों के तबादलों में पैसों के लेनदेन का मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने स्वयं शिक्षकों से खुलासा करवा अपनी ही सरकार को कठघरे में खड़ा कर लिया है। विपक्ष ने तो शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा को तत्काल प्रभाव से बर्खास्तगी की मांग उठाई ही है कांग्रेस में भी अंदरखाने में आवाज उठ रही है कि ऐसे व्यक्ति को मंत्री केवल मंत्री पद से ही नहीं पार्टी प्रदेशाध्यक्ष से भी तत्काल मुक्त करने की जरूरत है,क्योंकि इस प्रकरण के बाद कांग्रेस की जो छिछलेेदार हुई है ऐसे में डोटासरा को किसी भी पद पर कैसे बनाए रखा जा सकता है। शिक्षकों में तबादलों में पैसो के लेनदेन की उठी इस आवाज के साथ आरएएस, सव इंस्पेक्टर व रीट परीक्षा की धांधली का मामला भी फिर से गर्मा गया हैं।
आमजन से भी जो प्रतिक्रिया आई है उसने डोटासरा के साथ सरकार की कार्यशैली पर ही प्रश्न चिन्ह खड़ा हो गया है। डोटासरा कल मुख्यमंत्री के कोटा-बूंदी के प्रस्तावित दौरे में भी साथ जाने वाले है। तबादलो में भ्रष्टाचार की आवाज दौरे के दौरान भी उठ सकती है। इस आशंका को देखते हुए कई शुभचिंतक कांग्रेसी नेताओं ने मुख्यमंत्री तक ये बात पहुंंचाई है कि वे डोटासरा को तो कम से कम इस दौरे में अपने साथ ना ले जाए। सीएम की ओर से अपने ही सरकार के एक मंत्री ओर प्रदेश कांग्रेस की तबादलों को लेकर इस जग हंसाई से राजस्थान के कांग्रेसी हतप्रभ हैं।
इस बीच राज्यसभा सांसद डॉ.किरोड़ी लाल मीणा ने ट्वीट कर कहा है कि मुख्यमंत्री जी क्या सच में आपको पता नहीं है की शिक्षकों के तबादले, रीट भर्ती सभी में आजकल पैसा ही काम कर रहा है, और आपके जू तक नहीं रेंग रही … प्रतिपक्ष के उपनेता राजेन्द्र सिंह राठौड़ ने तीन ट़वीट शिक्षक तबादलों पर प्रतिक्रिया के आएं है। राठौड ने अपने पहले ट्वीट में कहा है कि अब तो मान भी जाइए, आज तो आपने अपने ही कानों से सुन लिया… क्या अब आप ऐसे भ्रष्ट मंत्रियों को बर्खास्त करेंगे ? या आपकी मिलीभगत है ?
राठौड़ के दूसरे ट्वीट में कहा गया है कि शिक्षक सम्मान समारोह में शिक्षा मंत्री जी की उपस्थिति में CM @ashokgehlot51 ने ट्रांसफर के लिए पैसे देने की बात पूछी तो सभी शिक्षकों ने एकस्वर में ‘हां’ में जवाब दिया। शिक्षक समाज का दर्पण होता है, जो कभी झूठ नहीं बोल सकते। आज शिक्षकों ने सरकार का भ्रष्ट चेहरा सभी को दिखाया है।
तीसरे ट्वीट में राठौड़ ने कांग्रेस के घोषणा पत्र को इंगित करते हुए कहा है कि जन घोषणा पत्र में ‘Zero Discretion, Zero Corruption & Zero Tolerance’ के सिद्धांत पर काम करने का वादा करने वाली गहलोत सरकार के शासन में भ्रष्टाचार की गंगोत्री बह रही है जिसमें सभी गोते लगा रहे हैं। आज हमारे शिक्षकों ने मुखिया जी को इस हकीकत से भी रूबरू करवा दिया है। शिक्षा विभाग तो एक बानगी है। कांग्रेस राज में किसी भी सरकारी विभाग में ट्रांसफर हो या अन्य कार्य, बिना रिश्वत के कोई काम नहीं होता। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के 64% नागरिकों ने भी स्वीकारा है कि सरकार में बिना रिश्वत के कोई काम नहीं करवाया जा सकता है।
भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने ट्वीट में लिखा है कि गहलोत जी का राजस्थान; जहां शिक्षकों के तबादलों में पैसा देना कमाल है; जहां परीक्षाओं में नक़ल भी कमाल है; जहां रिश्तेदारों को उपकृत करना कमाल है;जहां खान में मंथली कमाल है।राजस्थान जाने क्या दिख जाए।
आमजन की टिप्पणी की भी बानगी देख लिजिए….
इतने भी भोले ना बनो गहलोत जी ??जैसे कि आपको कुछ मालूम ही ना हो । आप जानते नही कि ये विधायक ट्रांसफरों में इतनी रुचि क्यों ले रहे हैं। जब आप राज्य के मुखिया बन कर बैठे हैं तो आपका यह कर्तव्य और दायित्व है कि पूरे प्रशासन पर आपका नियंत्रण और निगरानी होनी चाहिये। ना कि आप उल्टे
— Ravi Shankar (@RaviSha89601362) November 16, 2021
भ्रष्टाचारी की मंथली आलाकमान तक जाती है।
प्रदेश के बेरोजगार युवा इस टोडासरा व गहलोत सरकार से
परेशान हो गये ।
टोडासरा अपनी 7पिढियों का धन इकट्ठा कर रहा है— bajrangjangid (@bajrangjangid7) November 16, 2021
