जयपुर: कला एवं साहित्य की अखिल भारतीय संस्था संस्कार भारती द्वारा उत्तर पश्चिम क्षेत्र के 2 दिवसीय अभ्यास वर्ग का आयोजन 26 फरवरी प्रातः 10 बजे से जयपुर के सेवा सदन में प्रारम्भ हुआ। कार्यक्रम की प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए क्षेत्र प्रमुख डॉ. सुरेश बबलानी ने बताया इस अभ्यास वर्ग का उद्देश्य कलाओं के माध्यम से किस प्रकार आम जन को संस्कारित किया जा सकता है एवं कला साधक किस प्रकार भारतीय शैलियों पर अपना ध्यान केन्द्रित करें, इस पर रहेगा।
उद्घाटन सत्र को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रान्त प्रचारक डॉ. शैलेन्द्र ने मुख्य वक्ता की पीठ से बोलते हुए कहा कि कार्यकर्ता को अपरिचित को परिचित, परिचित को मित्र एवं मित्र को कार्यकर्ता बनाते हुए समाज एवं देश कार्य के लिए प्रवृत्त करना चाहिए। कार्यकर्ता का जीवन पारदर्शी एवं विश्वसनीय होना चाहिए। सभी को साथ में लेकर चलना एक श्रेष्ठ प्रामाणिक कार्यकर्ता का प्रमुख गुण होता है। समाज की उससे बहुत अपेक्षाएं भी होती हैं, ऐसा उद्बोधन उनका रहा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजेश शर्मा ने कहा कि कला के माध्यम से हम शीघ्र ही आपस में घुल मिल जाते हैं। संस्कार भारती के संरक्षक नन्दलाल बाबा जी का पाथेय प्राप्त हुआ। अखिल भारतीय महामंत्री एवं प्रसिद्ध सुरबहार वादक डॉ. अश्विन दलवी विशिष्ट अतिथि रहे एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कार भारती जयपुर प्रान्त की अध्यक्ष एवं प्रतिष्ठित ध्रुवपद गायिका प्रो. डॉ. मधु भट्ट तैलंग ने की। सत्र संचालन प्रान्त महामंत्री सतीश शर्मा ने किया।
इस आवासीय अभ्यास वर्ग के दो दिनों में कुल 8 सत्र रहने वाले हैं, जिसमें राजस्थान क्षेत्र के जयपुर, चित्तौड़ एवं जोधपुर प्रान्त से 50 से अधिक सदस्य सम्मिलित हो रहे हैं। नवगठित जयपुर महानगर कार्यकारिणी द्वारा इस पूरे कार्यक्रम की व्यवस्था की गई है।
अन्य सत्रों में संगठन की सैद्धांतिक पृष्ठभूमि, ध्येयगीत व्याख्या, विधा संयोजक गुण, कला दर्शन एवं भारतीय उत्सवों पर विद्वानों द्वारा प्रबोधन रहेगा। इसके साथ ही प्रान्तशः बैठकें रहेंगी जिसमें संगठन विस्तार, वार्षिक योजना एवं स्वाधीनता से स्वतन्त्रता कार्यक्रमों की रचना व छोटी छोटी टोलियों के गठन पर चर्चा रहेगी।

