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रीडर ने जज के फर्जी साइन करके सुना दिए फैसले, 5 सदस्यों की कमेटी बनाकर सौंपी जांच

जयपुर : शहर के मिनी सचिवालय में आज एक बड़ा मामले का खुलासा हुआ। अतिरिक्त संभागीय आयुक्त (एडीसी) कोर्ट में रीडर के पद पर नियुक्त मुकेश कुमार परसोया ने एडीसी के फर्जी साइन करके 6 मामलों में खुद के स्तर पर ही जजमेंट दे दिया। मामले का खुलासा होने के बाद रीडर को सस्पेंड करते हुए उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया गया है। वहीं इस रीडर के तमाम कार्यो की जांच के लिए 5 सदस्यों की एक कमेटी बनाई है, जो जयपुर में एडीसी के यहां लगने से लेकर अब तक किए गए तमाम कार्यो की जांच करके उसकी रिपोर्ट पेश करेगी।

डेट में बदलाव करके जजमेंट जारी करने पर आया पकड़ में

ये पूरा मामला कमला देवी बनाम तहसीलदार दांतारामगढ़ की रास्ते के मामले में लगी एक अपील के जजमेंट पर पकड़ा गया। दांतारामगढ़ में एक सामान्य रास्ते के मामले में एक अपील संख्या 11//21 कोर्ट में विचाराधीन थी। इस अपील पर कोर्ट ने सुनवाई की अगली डेट 28 फरवरी दे रखी थी, जो पोर्टल पर भी दर्शा रही थी। लेकिन रीडर ने रिश्वत लेकर इस अपील की फाइल में डेट को कांट-छांट करके 8 फरवरी कर दिया और उसी दिन की फर्जी सुनवाई बताते हुए उसके आधार पर अंतिम निर्णय देते हुए उसकी नकल जारी कर दी। रीडर से जारी इस फैसले के आधार पर विपक्षी पार्टी ने जमाबंदी व भू-नक्शे में नामांतरण खुलवा लिया।

इस मामले में जब दूसरी पार्टी के एडवोकेट ने अतिरिक्त संभागीय आयुक्त कोर्ट से ऑर्डर शीट की नकल चाही तो नकल नहीं दी। इसके पीछे कारण बताया कि अपील को रेवेन्यू बोर्ड ने तलब कर लिया, इसलिये नकल नहीं दे सकते। तब एडवोकेट कुमावत ने इस मामले की जब उच्च स्तर पर शिकायत की और जांच करवाई तो पूरे मामले का खुलासा हुआ।

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