जयपुर : नाहरगढ़ फोर्ट में बंद हुई कॉमिर्शलय एक्टिविटी (रेस्टोरेंट, होटल, बार) और लाइट-साउण्ड शो फिर से शुरू हो सकेंगे। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने पिछले साल नवंबर में एक आदेश जारी करके दिसंबर से कॉर्मर्शियल एक्टिविटी बंद करने के आदेश दिए थे। एनजीटी के इस आदेशों के खिलाफ पुरातत्व विभाग (आर्कियोलॉजी) राजस्थान और राजस्थान पर्यटन विकास निगम लिमिटेड (आरटीडीसी) ने सुप्रीम कोर्ट ने याचिका लगाई थी, जिस पर आज सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए स्टे दे दिया।
न्यायधीश अब्दुल नजीर और कृष्ण मुरारी की बैंच में आज इस मामले पर सुनवाई हुई। आरटीडीसी और आर्कियोलॉजी की तरफ से पैरवी करते हुए सीनियर एडवोकेट मनीष सिंघवी ने कोर्ट में बताया कि नाहरगढ़ फोर्ट में जो एक्टिविटी चलती थी वह नॉन फोरेस्ट एक्टिविटी में नहीं आती है। न ही इस एक्टिविटी के शुरू होने के बाद नाहरगढ़ क्षेत्र में पेड़-पौधों या जीव-जंतुओं को कोई नुकसान पहुंचाया गया है। वहीं इस पूरे मामले में एनजीटी की तरफ से सीनियर एडवोकेट अलदेशी रेन ने भी पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि इन एक्टिविटी की वजह से वन्यजीव-जंतु का जीवन प्रभावित होता है। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने एनजीटी के आदेशों पर स्टे दे दिया।
आपको बता दें कि पिछले साल 4 अक्टूबर को वनप्रेमी राजेंद्र तिवाड़ी की जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद एनजीटी ने नाहरगढ़ वाइल्ड लाइफ एरिया में सभी नॉन फॉरेस्ट एक्टिविटी को बंद करने के लिए कहा था। एनजीटी ने पुरातत्व विभाग और आरटीडीसी को कहा था कि अभ्यारण्य क्षेत्र में इस तरह की वाणिज्यिक गतिविधियां चलाने का आपको कोई अधिकार नहीं है और इसे तुरंत बंद करके फोर्ट को खाली किया जाए। साथ ही एनजीटी ने वन विभाग को निर्देश दिए थे कि वह फोर्ट पर अपना दखल दें और वहां अभ्यारण्य संरक्षण और ईको टूरिज्म डवलप करें।
