जयपुर। भगवान श्री कृष्ण की महत्वपूर्ण लीलाएं वन-जंगल में हुई है। तुलसी का वन यानी वृंदावन उनकी सर्व प्रिय स्थान रहा। जंगलों में गाय चराने के कारण उनका नाम गोपाल पड़ा। गोवर्धन पर्वत उठाने के कारण वे गिरिराज धरण कहलाए। यमुना नदी के किनारे वे घंटों बंशी बजाते थे। ऐसे में जन्माष्टमी का पर्व पहाड़, नदी और जंगल के बीच पौधरोपण कर मनाया जाए तो आज के संदर्भ में इसकी सार्थकता और बढ़ जाती है। गायत्री परिवार की ओर से सोमवार को राष्ट्रीय तरु पुत्र रोपण महायज्ञ के अन्तर्गत बस्सी तहसील के घाटा बैनाड़ा में शांतिकुंज स्वर्ण जयंती वन की स्थापना की गई। कृषि मंत्री लालचंद कटारिया की पत्नी गायत्री कटारिया मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रही। उन्होंने पौधा लगाकर अभियान का श्रीगणेश किया। गायत्री यज्ञ के साथ यहां बड़ी संख्या में बड़, पीपल और कदंब के पौधे लगाए गए।
वृक्ष गंगा अभियान, राजस्थान के प्रभारी विष्णु गुप्ता ने बताया कि यहां सघन वन विकसित किया जाएगा। यहां नींबू, जामुन, अशोक, करंज, पिल्कन के 300 से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं। अगले साल फिर पौधरोपण किया जाएगा। इस प्रकार यहां न्यूनत्तम एक हजार पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। तरु पुत्र रोपण महायज्ञ का संचालन शांतिकुंज हरिद्वार से ऑनलाइन किया गया। इस मौके पर गायत्री परिवार के वरिष्ठ परिजन भैंरूलाल जाट, रणवीर सिंह चौधरी, नेतराम शर्मा, सतीश भाटी, सोहनलाल शर्मा, विनोद शाह, डॉ. प्रशांत भारद्वाज, नवरतनपुरी उपस्थित रहे। स्थानीय परिजनों के रूप में भरत शर्मा, कृष्ण कुमार मीना, नमोनारायण मीना, शंकर मीना, सुरेश शर्मा उपस्थित रहे।. गायत्री महायज्ञ के साथ श्री गणेश: प्रारंभ में कीर्ति शाह और विवेक कुमार ने गायत्री यज्ञ करवाया।
शांतिकुंज स्वर्ण जयंती वन के अलावा गायत्री शक्तिपीठ ब्रह्मपुरी और वाटिका, प्रज्ञा पीठ में माता भगवती की बाड़ी स्थापित की गई। गायत्री परिवार के परिजनों ने अपने घर में भी वाटिका लगाई। बड़ी संख्या में पॉलीबैग और गमलों में पौधे लगाए गए। वहीं, गमलों में स्वास्थ्य लघु आरोग्य वाटिका स्थापित की गई। गमलों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले पौधे लगाए गए। घर-घर में शाक वाटिका भी स्थापित की गई।


