जयपुर: राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक तथा नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार के 3 वर्ष के कार्यकाल पर सरकार के कार्यों तथा सरकार की विफलता को लेकर गहलोत सरकार पर जोरदार निशाना साधा। सांसद बेनीवाल ने कहा कि प्रदेश में आमजन सरकार की गलत नीतियों से बेहाल है,वहीं राज्य में जघन्य अपराधो के बढ़ते ग्राफ से आमजन में खौफ है। इसके चलते राजस्थान अपराधियों की ऐशगाह बना हुआ है। गहलोत के शासन में राजस्थान महिला अपराध में देश भर में प्रथम व बाल अपराध में पांचवे स्थान पर पहुंच गया। पुलिस का इकबाल खत्म हो जाने से लोग पुलिस थानों व अधिकारियो के पास जाने के बजाय गुंडों व माफियाओं की चौखट पर जा रहे है ।
बेनीवाल ने कहा की भ्रष्टाचार इस कदर हावी हुआ है कि शासन में पारदर्शिता की बात करने वाली गहलोत सरकार घूसदर्शिता पर चल रही है।
सांसद ने सरकार के कार्यकाल पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रदेश में सड़को के हालात खस्ता है। किसानो की सम्पूर्ण कर्ज माफी व बेरोजगारी भत्ते देने के दावे के साथ बनी सरकार इन वादों के साथ उन वादों से भी मुकर गई जो उन्होंने चुनाव से पूर्व प्रदेश के विकास के लिए किए ।
जनता के कार्य करने के बजाय गहलोत कुर्सी बचाने में व्यस्त
बेनीवाल ने यहा जारी एक अन्य वक्तव्य में कहा कि जनता के कार्य करने के बजाय गहलोत कुर्सी बचाने में ही व्यस्त रहे। जनता को अपने मुख्यमंत्री से उम्मीदें होती है मगर कोरोना काल से पूर्व गहलोत जहां दिल्ली की परिक्रमा करने में व्यस्त रहे वहीं कोरोना काल में लंबे समय तक घर में ही बंद रहे। जनता को संकट में छोड़ दिया। राजस्थान की सरकार आज 3 वर्ष के कार्यकाल को उत्सव को रूप में मना रही है,लेकिन प्रदेश को गर्त में धकेल कर उत्सव मनाना किस दृष्टि से सही है ? सरकार का हाल यह ब्यूरोक्रेसी इस कदर हावी है कि उन्होंने जनहित के निर्णय लेने की क्षमता में सीएम तक को पंगु बना रखा है। ब्यूरोक्रेटस मनमाफिक रूप से निर्णय लेने के लिए बेलगाम हो रखे है। पुत्र मोह में डूबे मुख्यमंत्री गहलोत जनहित को दरकिनार करके धृतराष्ट्र की भूमिका में नजर आ रहे है। इस शासन में प्रत्येक भर्ती का पेपर आउट हुआ जो बेरोजगारों के हितों के साथ कुठरघात है। राजस्थान लोक सेवा आयोग जैसी संस्था भी भ्रष्टाचार से अछूती नहीं रही। सीएम का गृह जिला जोधपुर अपराध में राजस्थान में सबसे अग्रणी जिलों में से एक है जो यह इंगित कर रहा है कि गहलोत गृह जिले की कानून व्यवस्था संभालने में भी नाकाम नजर आ रहे है ।
