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पर्यावरण की रक्षार्थ प्रत्येक रविवार को गोमय यज्ञ

पर्यावरण की रक्षार्थ प्रत्येक रविवार को गोमय यज्ञ

जयपुर। पर्यावरण की रक्षा और पेड़ों को बचाने के लिए जयपुर की स्वयंसेवी संस्था गोमय परिवार ने अन्य सहयोगी संस्थाओं को साथ लेकर राजधानी में हर रविवार को गोमय यज्ञ करने का बीड़ा उठाया है। इसकी शुरुआत 27 मार्च से होगी। गोमय परिवार के निदेशक डॉ. सीताराम गुप्ता ने बताया कि पर्यावरण को परिष्कृत करने एवं शहर को प्रदूषण से मुक्त बनाने के लिए गोमय परिवार ने गोमय यज्ञ श्रृंखला के तहत 51 पंच कुंडीय गोमय यज्ञ करने का निश्चय किया है।

इसके तहत 27 मार्च से निरंतर 51 सप्ताह तक जयपुर के अलग-अलग क्षेत्रों में पंच कुंडीय यज्ञ का आयोजन कर जयपुर को प्रदूषण मुक्त बनाया जाएगा है। यज्ञ में देसी नस्ल की गाय का घी और गोमय समिधा का उपयोग किया जाएगा। इस अभियान में गोमय परिवार को अनेक सामाजिक संस्थाओं का भी सहयोग मिल रहा है। इसकी मौखिक स्वीकृति मिल चुकी है।

इसी अभियान से जुड़े विवेकानंद शर्मा ने बताया कि इस बार भी होलिका दहन भी ज्यादा से ज्यादा स्थानों पर गो काष्ठ, उपले, कंडों से करवाने के लिए चेतना अभियान प्रारंभ कर दिया गया है। इस प्रयोग से हजारों पेड़ों को होलिका दहन के लिए कटने से बचाया जा सकेगा। अंतिम संस्कार भी गोकाष्ठ से भी संपन्न करवाए जाएंगे।

प्रत्येक दाह संस्कार के लिए दो  पेड़ काटकर जला दिए जाते हैं। उसे बचाने के लिए गो काष्ठ, गोमय समिधा के उपयोग को जयपुर के मोक्ष धामों पर प्रारंभ करवाने के लिए  नगर निगम ग्रेटर  और गोमय परिवार के मध्य एमओयू साइन किया गया है। प्रारंभिक स्तर पर 11 मोक्ष धाम पायलट प्रोजेक्ट के रूप में दिए गए हैं। इसे सफलतापूर्वक संचालन के बाद जयपुर के समस्त मोक्ष धामों पर यह व्यवस्था लागू करवा दी जाएगी। इससे लाखों पेड़ों को प्रतिवर्ष कटने से बचाया जा सकेगा।

लकड़ी की जगह लेगा गोकाष्ठ:

डॉ. सीताराम गुप्ता ने बताया कि बात चाहे विवाह संस्कार की हो या यज्ञ-हवन की। होलिका दहन हो या अंतिम संस्कार। इन सबमें लकड़ी जलाई जाती है। लकड़ी के विकल्प के रूप में  गोमय परिवार ने गोमय समिधा यानि देसी नस्ल की गौ माता के गोबर एवं एग्रीकल्चर वेस्ट के संयोजन से बनाई गई हवन योग्य लकड़ी से यह सब क्रियाएं संपन्न करवाने का बीड़ा उठाया गया है।

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