पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री चिदंबरम ने वैक्सीनेशन पर केंद्रीकृत व्यवस्था को लेकर मोदी सरकार को घेरा

जयपुर : पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने कोरोना काल में मोदी सरकार की केंद्रीकृत व्यवस्था की आलोचना करते हुए इसे सबसे बड़ी चुनौती बताया है। चिदंबरम ने कहा- कोरोना काल में सत्ता का केंद्रीकरण सबसे बड़ी चुनौती है। इसका असर वैक्सीनेशन कार्यक्रम पर पड़ा। सच्चे लोकतंत्र में केंद्रीकरण नहीं होना चाहिए। इससे वैक्सीन की खरीद पर फैसला लेने में देरी हुई। वह राजस्थान विधानसभा में वैश्विक महामारी और लोकतंत्र की चुनौतियां विषय पर आयोजित सेमिनार में बोल रहे थे।

चिदंबरम ने कहा- यूरोप के कुछ देशों ने हमारी कोवैक्सिन को अनुमति दी। दो घरेलू वैक्सीन उत्पादकों के हितों की रक्षा करने की कोशिश की, लेकिन इस फेर में देश ने किसी विदेशी वैक्सीन को खरीदने की कोशिश ही नहीं की। कई देशों ने अपनी जनता के लिए भारी संख्या में विदेशी वैक्सीन खरीदी। इसका नतीजा रहा की भूटान जैसा छोटा देश तो वैक्सीन ले ही नहीं पाया। चिदंबरम ने आगे कहा कि हमें इस महामारी के दौरान उभरे कई सवालों के जवाब खोजने होंगे। इसे क्या कहा जाए? क्या समझा जाए? क्या देश की सरकार ऐसे हालात में गरीबों, वंचितों के जीवन की रक्षा कर पाई? इस सवाल के जवाब कई बार एक-दूसरे को गलत ठहराते दिखेंगे। गरीब, वंचित वर्ग को बचाने और उसके उत्थान के लिए हमें इन सवालों का जवाब खोजना ही होगा।

कब खत्म होगी महामारी किसी को नहीं पता

सेमिनार में चिदंबरम ने कहा- सेमिनार के दो हिस्से हैं। एक तो कोरोना महामारी और दूसरा लोकतंत्र। देश में कल तक 40 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। महामारी की सबसे डरावनी बात यह है कि किसी को नहीं पता कि यह कब खत्म होगी? लेकिन सवाल यह है कि इसमें लोकतंत्र को चुनौतियों की बात क्यों आई? हर सरकार और शासन व्यवस्था को इससे चिंतित होना चाहिए। इसे रोकने के लिए वैक्सीनेशन जरूरी है। सभी तरह की सरकारों के लिए यह चुनौती है, लेकिन यह लोकतंत्र के लिए कुछ ज्यादा पेचीदा मुद्दे लेकर आया है। राजस्थान के या दूसरे राज्य के लोगों की जरूरत क्या है?

संशाधनो की कमी भी चुनौती रही

चिदंबरम ने कहा- तीसरी चुनौती संसाधनों की कमी है। सरकारों के लिए स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र प्राथमिकता होने चाहिए। हमारे देश में किसी राजनीतिक दल को इन दिनों की कमी के लिए प्रताड़ित नहीं किया गया। शिक्षा के मामले में भी परेशानियां बढ़ी। अमीर – गरीब की बढ़ती खाई भी लोगों के सामने संकट बनी। हालात ऐसे हैं की पांचवी का बच्चा दूसरी कक्षा की किताब नहीं पढ़ सकता। ऑनलाइन पढ़ाई शुरू तो हुई, लेकिन जिनके पास संसाधन नहीं उनका क्या?

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