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अक्टूबर में कोयले की 415 रैक डिस्पेच, तापीय इकाइयों में 2015 मेगावाट विद्युत उत्पादन पुनः शुरु

जयपुर। बिजली की कमी के कारण शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में कहीं भी बिजली की कटौती नहीं करनी पड़ रही है। राज्य में कोयला की आपूर्ति में कमी और विद्युत संकट के बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के प्रयासों से लगातार स्थिति में सुधार आया है और प्रदेश में बिजली की आपूर्ति सामान्य स्तर पर आ गई है। इस बीच अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुबोध अग्रवाल ने एनर्जी विभाग से जुड़ी सभी कंपनियों के सीएमडी व एमडी से वर्चुअल बैठक कर विद्युत मांग, उपलब्धता व आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा की और आगामी तीन माह की विद्युत मांग, उपलब्धता का आंकलन करने के निर्देश दिए हैं।

अतिरिक्त मुख्य सचिव एनर्जी डॉ. सुबोध अग्रवाल ने बताया कि अक्टूबर माह में अब तक प्रदेश में कोयले की 415 रैक डिस्पेच हुई है। जबकि सितंबर के पूरे माह में राज्य में कोयले की 402 रैक ही मिली थी। यह सब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की उच्चस्तरीय पहल और समग्र प्रयासों से संभव हो पाया है। अक्टूबर माह में 26 अक्टूबर तक कोल इंडिया की अनुषंगी कंपनियोें एनसीएल और एसईसीएल से जहां 162 रैक कोयला की डिस्पेच होकर प्राप्त हुई है वहीं राज्य सरकार की पीकेसीएल से कोयले की 253 रैक डिस्पेच हुई है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की पीकेसीएल से गत माह की तुलना में कोयले की 23 रैक अधिक डिस्पेच होने से प्रदेश में बिजली की उत्पादकता और उपलब्धता में सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

पिछले दिनों नई दिल्ली में कोयला सचिव, पॉवर सचिव और पर्यावरण सचिव से चर्चा के दौरान प्रभावी तरीके से राज्य का पक्ष रखा गया जिस पर केन्द्रीय सचिवों ने कोयले की आपूर्ति बढ़ाने के स्पष्ट संकेत दिए है। कोल इंडिया व राज्य सरकार की पीकेसीएल दोनों से ही कोयले की रैक प्रतिदिन डिस्पेच हो रही है।

राज्य मेें बंद तापीय विद्युत इकाइयों में भी प्राथमिकता से बिजली का उत्पादन आरंभ किया जा रहा है और इस माह 6 इकाइयों में करीब 2015 मेगावाट विद्युत उत्पादन शुरु किया गया है। सूरतगढ मेें 250-250 मेगावाट विद्युत उत्पादन क्षमता की दो इकाइयों में उत्पादन शुरु हो गया हैं वहीे इससे पहले कालीसिंध तापीय में 600 मेगावाट, कोटा तापीय विद्युत गृह में 195 और सूरतगढ़ तापीय विद्युत गृह में यूनिट 6 में 660 मेगावाट का उत्पादन आरंभ हो गया है।

ऊर्जा मंत्री डॉ. बीडी कल्ला विद्युत समस्या को लेकर गंभीर है और कोयले की उपलब्धता, विद्युत उत्पादन, औसत मांग व अधिकतम मांग के साथ ही वैकल्पिक उपायों की नियमित समीक्षा कर अधिकारियों को आवष्यक दिशा निर्देश दे रहे हैं।

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