जयपुर। राज्य सरकार ने अलवर विमंदित बालिका के प्रकरण की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपे जाने का निर्णय लिया है। इसके लिए राज्य सरकार की ओर से जल्द केंद्र सरकार को अनुशंसा भेजी जाएगी। माना जा रहा है कि इस प्रकरण के कारण सरकार की हो रही बदनामी तथा विपक्ष को घर बैठे मुद्दा मिल जाने की स्थितियों को भांपते हुए गहलोत सरकार ने ये कदम उठाया है। इस प्रकरण को लेकर आलाकमान का भी दबाव था। कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी ने पीड़िता के परिजनों व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से फोन पर बात की थी उसके बाद ही लगने लगा था कि कोई बड़ा एक्शन होगा। पंजाब, उत्तरप्रदेश व उत्तराखंड चुनावों में भी इसका असर पड़ने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी का डेलिगेशन आज ही अल्टीमेटम देकर गया हैं।
सीबीआई को जांच सौंपने का यह निर्णय रविवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री निवास पर वीसी के माध्यम से हुई उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया।
बैठक में गृह राज्य मंत्री राजेन्द्र सिंह यादव, मुख्य सचिव निरंजन आर्य, अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह अभय कुमार, पुलिस महानिदेशक एमएल लाठर, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अपराध शाखा आरपी मेहरड़ा, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक सुरक्षा एस संेगथिर, एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुधीर भण्डारी एवं जेके लोन अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अरविंद कुमार शुक्ला सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
देर आए दुरस्त आए – किरोड़ी
अलवर मामले को सीबीआई को सौंपने पर सांसद किरोड़ी लाल मीणा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जी आप देर आए दुरुस्त आए। अलवर में मूक-बधिर बेटी के मामले में आपने सीबीआई जांच का आदेश दिया है। इस मामले को लेकर मैं प्रियंका गांधी जी से सवाईमाधोपुर में मिलना चाहता था, लेकिन उन्होंने प्रदेश की बेटियों से मिलने से इंकार कर दिया और आपकी तानाशाह पुलिस ने मुझे गिरफ्तार कर लिया।
खैर…
इस मामले में आपको सत्ता और संगठन के लोगों ने गुमराह किया है, मामले को दबाने के बहुत प्रयास किए गए। ऐसा कर इस प्रदेश की बेटीयों का अपमान किया है, इसके लिए यह जनता आपको माफ नहीं करेगी। सीबीआई जांच में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा…
