जयपुर। राज्य के छह जिलों में हो रहे जिला परिषद एवं पंचायत चुनाव का आज अंतिम चरण हैं । वोट गिरने से पहले जो तस्वीर उभरकर सामने आ रही है उसमें कांग्रेस के लिए जिला प्रमुख व प्रधान बनाने में बाजी मार पाना कोई आसान खेल नज़र नहीं आ रहा। कांग्रेस सत्ता में है और सत्ताधारी दल की जिस तरह से इन चुनावों को लेकर जो व्यूह रचना बननी चाहिए थी वह भी नहीं बनी और ना ही संगठन ने मोर्चा संभाला जिससे कांग्रेस के अधिक से अधिक जिला प्रमुख व प्रधान बन सके।
संगठन स्तर पर आ रही मुश्किलों को देखते हुए चुनाव मैदान में जुझ रहे कांग्रेस के साथ निर्दलीय व बसपा से कांग्रेस में आए विधायक सभी को पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट याद आ रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस संगठन ने टिकट तो विधायकों के कहने पर दे दिए,लेकिन उसके अलावा किसी तरह की जमीनी मेहनत संगठन स्तर पर नहीं की गई जो कांग्रेस की झोली इन चुनावों में भर सके। निर्दलीय बाबूलाल नागर जैसे विधायक सचिन पायलट के पोस्टर फोटों का उपयोग ले गणित का आंकड़ा अपने पक्ष में बैठने में जुटे हैँ,लेकिन इस सबके बावजूद वे पूरी तरह से विश्वस्त नहीं है कि वे अपना प्रधान बना ले जाएंगे,जबकि नागर तो अपने पुत्र को प्रधान व पुत्रवधू को प्रधान बनाने की जुगत में हैं।
इसी तरह चाकसू से कांग्रेस विधायक तथा सचिन पायलट के सबसे खास माने जाने वाले वेद प्रकाश सोलंकी की भी रातों की नींद उड़ी हुई हैं। वे भी दिनरात एक किए हुए हैं और विधानसभा चुनाव के समय किए सभी वादे पूरे होने की बात को भी जोर शोर से प्रचारित करने में लगे हुए हैं। इस सबके बावजूद चाकसू, माधोराजपुरा व कोटखावदा में भाजपा व अन्य ने मुकाबला कड़ा बना डाला हैं,हालांकि वेद प्रकाश सोलंकी दावा कर रहे हैं कि क्षेत्र में हुए विकास कार्य व जनता की सेवा में 24 घंटो तत्पर रहने का लाभ इन चुनावों में अवश्य मिलेगा,लेकिन उन्हें भी पायलट ही याद आ रहे हैं। कमोबेश कुछ ऐसी ही स्थिति जयपुर जिले के अन्य पंचायत क्षेत्रों की हैं। दौसा, सवाईमाधोपुर, जोधपुर,भरतपुर व सिरोही में भी कुछ ऐसे ही हालातों की रिपोर्र्ट आ रही हैं।
कांग्रेस के लिए रोलापा भी सिरदर्द
प्रदेश कांग्रेस संगठन की तरफ से सपोट नहीं मिलने से अधिकांश विधायक खिन्न नजर आ रहे हैं और अपने कार्यकर्ताओं के बीच ये कहते सुने गए कि संगठन की कमान तो कम से कम ऐसे नेता के हाथ में होनी चाहिए जो सत्ता व संगठन स्तर पर पूरा सहयोग प्रदान कर सके। कांग्रेस के लिए कुछ क्षेत्रों में हनुमान बेनीवाल की रोलापा भी सिरदर्द बनी हुई हैं। खासकर मुख्यमंत्री के गृहजिले जोधपुर में। वहां कांग्रेसियों में आपसी झगड़े भी जगजाहिर हैं। चुनाव परिणाम आने पर ही पता चल पाएगा कि कांग्रेसियों ने जो पसीने बहायें वे वोटों में कितने तब्दील हुए। सरकार विरोधी लहर का भी कुछ स्थानों पर असर हैं।
भाजपा की बाड़ाबंदी,कालबेलिया नृत्य
जिला परिषद एवं पंचायत समिति सदस्यों के अंतिम चरण के मतदान से पहले ही भाजपा ने अपने प्रत्याशियों की बाड़ाबंदी कर दी। जिला परिषद सदस्यों को प्रशिक्षण के नाम पर एक साथ रखा गया है। एक निजी रिसोर्ट में परिवार भ्रमण के नाम पर रखा गया है जहां कालबेलिया नृत्य व अन्य मनोरंजन भी किया जा रहा है।

