जयपुर : सीएम साहब! REET ने मेरी मांग का सिंदूर उजाड़ डाला। इकलौते बेटे के सिर से बाप का साया उठ गया। बूढ़े मां-बाप की लाठी हमेशा-हमेशा के लिए छीन गई। अब आप भी मेरी नहीं सुन रहे…. आप तो हमारे मुखिया हो मुझे न्याय दो। आंखों में आंसू लिए धरने पर बैठी मनीष जाट की व्यथा है यह। सांसद डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के साथ ईडी ऑफिस के बाहर धरने पर बैठी है विधवा मनीष। उसने बताया-मजदूरी कर पति ने मुझे पढ़ाया। आपकी REET परीक्षा में मैं भी एक परीक्षार्थी थी। मैं चाहती थी कि सरकारी नौकरी पाकर सड़क पर रहने वाले मेरे पति को विश्राम दूं। उस रोज मेरे पति रामनिवास जाट कोलकाता से आपके ही REET परीक्षा के पेपर लेकर आ रहे थे कि उन्हीं पेपरों ने उनकी जान ले ली। उनकी ईमानदारी देखिए कि पेपर के बारे में पत्नी होते हुए भी मुझसे शेयर नहीं करना चाहते थे।
सरकार तंत्र की लापरवाही के कारण मैंने मेरा पति भी खो दिया तथा REET पेपर लीक के कारण मेरा भविष्य अनंत अंधकार में चला गया। मेरे पति न सिर्फ स्वाभिमानी बल्कि ईमानदार भी थे। पति की मौत के 2 दिन बाद मैंने REET की परीक्षा दी और 64 नंबर आए। अब सातवीं में पढ़ रहा मेरा बेटा किसके सहारे रहेगा? मनोहरपुर-दोसा नेशनल हाईवे पर मेरे पति के कंटेनर पलटने का कारण आपकी पुलिस ने सड़क पर आवारा मवेशी आना बताया, लेकिन यह झूठ है। सच बात तो यह है कि पति की षडयंत्रपूर्वक और सुनियोजित हत्या की गई है। जो पति अपनी अर्धांगिनी के हित के लिए भी अपना ईमान ना बेचे, उसने REET पेपर लीक करने पर आमादा माफियाओं के सामने निश्चय ही घुटने नहीं टेके होंगे।
REET पेपर लीक वाले माफियाओं ने पेपर पाने के तमाम प्रयास विफल होने के बाद मेरे पति की षडयंत्र पूर्वक हत्या कर कंटेनर में रखे पेपरों को हासिल कर करोड़ो रुपए में बेचने के अपने मंसूबे पूरे किए हैं। जो ठेकेदार मेरे पति को कंटेनर चलाने ले गया था उसने भी इस दुःख की घड़ी में किराए की राशि भी मुझे उपलब्ध नहीं कराई। सीएम साहब! आपसे एक ही सवाल पूछना चाहती हूं कि कंटेनर पलटने से पहले आगे पीछे पुलिस एस्कॉर्ट क्यों नहीं थी? और रात भर पुलिस के पहरे में रहे रीट परीक्षा के पेपर को दूसरे कंटेनर में लादने के बाद एस्कॉर्ट मुहैया क्यों कराई गई ?मेरे पति की आपकी “गंदी रीति” पर टिकी REET ने बलि ले ली। मांग उजाड़ने के साथ-साथ मेरे हाथ से नौकरी पाकर भविष्य निर्माण का मौका भी छीन कर चकनाचूर हो गया। अब मैं क्या करूं ? जाऊं तो जाऊं कहां?
महोदय, मेरे परिजनों और ससुराल वालों ने तो तत्समय ही मेरे पति की मौत को हादसा मानने से इनकार करते हुए इसे षडयंत्र पूर्वक हत्या करार देते हुए सीबीआई से जांच कराने की गुहार की थी लेकिन हमारी आवाज दब गई। आपसे सिर्फ इतनी सी गुजारिश है कि आप मुझ विधवा के साथ न्याय करें l मेरे पति की मौत के अनुसंधान को सीबीआई को सौंप दें। आपका नैतिक दायित्व है कि मुझे सरकारी नौकरी और परिजनों को कम से कम 25 लाख रुपए की तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान करें।
इधर किरोड़ी ने कहा, न्याय नहीं मिला तो धरने से नहीं हटूंगा
महिला के साथ धरने पर बैठे सांसद डॉ. किरोडी लाल मीणा ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री इस विधवा से मिलकर इसकी मांगों को पूरा नहीं करते हैं तो भी धरने से नहीं हटेंगे चाहे इसकी कितनी भी कीमत उन्हें चुकानी पड़े। डॉ. मीणा ने कहा कि REET मामले में सीबीआई जांच को लेकर वे पहले ही मांग उठा चुके हैं और इसे पूरा करवा कर ही दम लेंगे।
