नई दिल्ली/जयपुर : आरएलपी सुप्रीमो व नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल द्वारा लोकसभा में हरिके स्थित इंदिरा गांधी फीडर के हेडवर्क की क्षमता 15 हजार क्यूसेक से डिजाइन की गई क्षमता 18 हजार क्यूसेक के अनुरूप करने की मांग से जुड़े सवाल पर जल शक्ति मंत्रालय गजेंद्र सिंह शेखावत ने लिखित में जवाब देते हुए कहा कि हरीके में इंदिरा गांधी फीडर के हेड रेगुलेटर की डिजाइन और निर्माण 15000 क्यूसेक की क्षमता के साथ किया गया था। उसके बाद इंदिरा गांधी फीडर को 18500 की डिजाइन क्षमता के साथ निर्मित किया गया था।
इंदिरा गांधी फीडर की क्षमता के बेहतर उपयोग के लिए हेड रेगुलेटर की क्षमता में वृद्धि के मुद्दों पर जल शक्ति मंत्रालय का पंजाब तथा राजस्थान की सरकारों के साथ विचार-विमर्श चल रहा था। लेकिन 25 जुलाई 2019 को राजस्थान में पंजाब के मुख्यमंत्रियों के मध्य इस विषय पर हुई बैठक के बाद लिए गए निर्णय की अनुपालना में राजस्थान तथा पंजाब के मुख्य अभियंताओं ने 30 जुलाई 2019 को साइट का निरीक्षण किया व यह निष्कर्ष निकाला कि सीमित क्षेत्र उपलब्ध होने के कारण इंदिरा गांधी फीडर के हेड रेग्युलेटर में अतिरिक्त निर्माण संभव नही है। साथ ही कुछ तथ्यो के साथ मंत्री शेखावत ने कहा यह द्विपक्षीय मुद्दा सुलझ गया है, हनुमान बेनीवाल ने मंत्री द्वारा दिये गए जवाब पर कड़ी आपत्ति व्यक्त की और कहा कि जिन तारीखों के हवाले के बाद मंत्री शेखावत मामले में समाधान होना बता रहे।
जबकि उन तारीखों के बाद राजस्थान के मुख्यमंत्री ने 14 अक्टूबर 2019 को पंजाब के मुख्यमंत्री एवं 09 सितंबर 2020 को राजस्थान के सीएस ने पंजाब के सीएस को पत्र लीखकर हेड रेगुलेटर की मॉडल स्टडी करने के लिए अनुरोध किया, ताकि इस मुद्दे का समाधान निकल सके। ऐसे में यह स्पष्ट है कि मामला सुलझा नही अन्यथा राजस्थान व पंजाब के मध्य इस मामले को लेकर पत्राचार नही होता। सांसद बेनीवाल ने कहा कि इस हैड रेगुलेट की क्षमता बढ़ने से बाढ़ के व्यर्थ बह जाने वाले पानी का उपयोग किया जा सकता है।
परन्तु राजस्थान के इस अनसुलझे मामले को सुलझा हुआ बता दिया गया ऐसे में इतनी बड़ी चूक जल शक्ति मंत्रालय की कैसे रही उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। सांसद बेनीवाल ने कहा कि जल शक्ति मंत्रालय ने अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए इस तरह भ्रमित करने वाला जवाब दिया। जबकि जल शक्ति मंत्री स्वयं राजस्थान से है तो उन्हें रुचि लेकर मामले में तकनीकी समाधान करवाने की जरूरत थी।
