जयपुर। वल्लभ नगर उपचुनाव से पहले गुलाबचंद कटारिया का राम पर आया बयान और कांग्रेस की ओर से राम को मुद्दा बनाए जाने की खबरों के बीच इस विधानसभा क्षेत्र में प्रभावशाली जनता सेना का बयान भी राम को लेकर आया हैं। जनता सेना के मुखिया भीण्डर राजघराने के सदस्य रणधीरसिंह भीण्डर ने यह कहकर कि “राम के असली वंशज हम हैं” राम को लेकर चुनावी मुद्दे को नया मोड दे दिया हैं। भीण्डर ने भाजपा-कांग्रेस की राम को लेकर बयानबाजी को लेकर कहा कि ये दोनों दल तो दिखावें की लड़ाई लड़ रहे हैँ। असल में खेल तो यह है कि मिलकर जनता सेना को कैसे रोका जा सके। कटारिया के बयान के पीछे यहीं कूटनीति नजर आती हैं,क्योंकि राम के नाम पर बखेड़ा करके उन्होंने इस मुद्दे को जानबुझकर उछाला है ताकि दिखावे के तौर पर भाजपा-कांग्रेस में लड़ाई नजर आएं।
कांग्रेस-भाजपा पहले भी लड़ चुके है मिलकर चुनाव
जनता सेना के खिलाफ ये दोनों दल 2018 के विधानसभा चुनाव में एक हो चुके हैं। गत विधानसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार ने मतदान के दौरान ही भाजपा को वोटरों को कहना शुरू कर दिया था कि गुलाबजी भाईसाहब ने कहलाया है कि हम तो जीत नहीं रहे इसलिए भीण्डर को रोकने के लिए कांग्रेस को वोट दे। इससे पहले 2015 में भीण्डर पंचायत समिति के चुनाव मेंं कांग्रेस-भाजपा ने मिलकर अपने प्रधान व उप प्रधान बनाएं थे। भीण्डर पंचायत समिति की स्थाई समितियों के चुनाव में भी दोनों ने साथ मिलकर जनता सेना को रोकने का काम किया था। 2014 में हुए कानोड़ पालिका चुनाव में कांग्रेस-भाजपा ने मिलकर भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया था।
ब्राह्मण व रावत समाज को लेकर भी टिप्पणी
जनता सेना प्रमुख रणधीरसिंह भीण्डर ने मर्यादा पुरुषोत्तम राम के नाम को लेकर की गई टिप्पणी की भ्रत्सना करते हुए कहा कि कटारिया की रावत ब्राह्मण समाज के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी देख लगता है कि वे मेवाड़ में जनता सेना के वर्चस्व से बौखला गए हैं। आपको बता दे कि वल्लभनगर विधानसभा क्षेत्र में राजपूतों के अलावा रावत व ब्राह्मण ही सबसे प्रभावी मतदाता हैं। कटारिया के बयान से उपजी नाराजगी भाजपा को नुकसान ही पहुंचाने वाली हैं।
भाजपा का प्रदेश व राष्ट्रीय नेतृत्व भी स्तब्ध
इस बीच विवादों के भंवरजाल में फंसे कटारिया के वक्तव्य से भाजपा का प्रदेश व राष्ट्रीय नेतृत्व भी स्तब्ध हैं। कटारिया के महाराणा प्रताप पर दिए गए वक्तव्य के कारण राजसंमद चुनाव भी भाजपा बड़ी मुश्किल से जीत पाई थी। सराड़ा व सुजानगढ़ में करारी हार का सामना करना पड़ा था। यह भी पता चला है कि भाजपा ने वल्लभनगर उपचुनाव के लिए जीताऊं उम्मीदवार की तलाश करने केन्द्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल को भेजा था। मेघवाल की रिपोर्ट मे साफ कहा गया बताया कि भाजपा को यह सीट जीतनी हैं तो जनता सेना के रणधीरसिंह भीण्डर को पार्टी में शामिल कर उम्मीदवार बनाना चाहिए। इस रिपोर्ट का पता चलने के बाद ही नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया के बौखलाहट भरे बयान आ रहे हैं।
भाजपा की मजबूरी
दूसरी तरफ वल्लभनगर को लेकर सच्चाई से वाफिक होने के बावजूद केन्द्रीय व प्रदेश नेतृत्व की मजबूरी हैं कि वह जनसंघ के जमाने के अपने कार्यकर्ता को एकाएक अलग-थलग नहीं कर सकती। भाजपा की परेशानी यह है कि कटारिया को आरएसएस का भी साथ मिला हुआ हैं। राजनैतिक जानकारों का मानना है कि जिन दो सीटों धरियावद व वल्लभनगर सीट पर उपचुनाव होने हैं वे दोनों ही सीटें मेवाड़ में है और उस पर भाजपा उम्मीदवारी में कटारिया की राय ही प्रमुख रहने वाली हैं। दोनोंं ही सीटों के वर्तमान में जो समीकरण दिख रहे हैँं वे भाजपा के अनुकूल नहीं कहे जा सकते। अगर दोनों ही सीटों में से एक पर भी सफलता भाजपा को नहीं मिलती है तो हार का ठीकरा कटारिया के सिर पर ही फूटने वाला हैं उसके बावजूद वे अपनी जिद्द पर अड़े हुए हैँं और प्रदेश व राष्ट्रीय नेतृत्व कटारिया के मामले में मौन साधे हुए हैं।
भाजपा-कांग्रेस से त्रिकोणीय मुकाबले को भींडर तैयार
यहां उल्लेखनीय है कि वल्लभनगर से 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में जनता सेना के रणधीर सिंह भींडर ही कांग्रेस के मुकाबले में दूसरे नम्बर पर रहे थे, जबकि भींडर ने 2013 का चुनाव जनता सेना के बैनर पर जीता था। 2003 में वे भाजपा की टिकट पर जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। कटारिया से झगड़े के कारण ही उन्हें अलग दल बनाना पड़ा। इस बार भी जनता सेना से भींडर ही भाजपा-कांग्रेस उम्मीदवारों के साथ त्रिकोणीय मुकाबला बनाने के लिए चुनावी मैदान में उतरने का शंखनाद कर चुके हैं। उपचुनाव की तिथि अभी आई नहीं है और ना ही भाजपा उम्मीदवार तय हुए हैं। दोनों ही दलों ने चुनावी तैयारी जरूर शुरू कर दी हैं। कांग्रेस की तो कल ही तैयारी बैठक जयपुर में हुई हैं। भिंडर कटारिया को उपचुनाव के मैदान में मुकाबले की चुनौती भी दे चुके है।


