नई दिल्ली। भाजपा सांसदों की दिल्ली में राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा व राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष की उपस्थिति में हुई बैठक में सांसदों व अन्य नेताओं से कहीं अधिक पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की उपस्थिति सबसे चौकान्ने वाली रही। राजे लम्बे अरसे बाद राजस्थान के नेताओं के साथ बैठक में नजर आई। भाजपा कार्यसमिति की बैठक में राजे वर्चुअल ही जुड़ी थीं।
राजे के अलावा बैठक में सांसदों के अलावा राजस्थान के नेताओं में प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां, नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया व उप नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़, संगठन महामंत्री राजस्थान चन्द्रशेखर, प्रदेश सहप्रभारी भारती बेन, राष्ट्रीय सचिव अलका गुर्जर विशेष रूप से उपस्थित थीं। कोरोना में केन्द्र के प्रबंधन तथा मोदी सरकार के कामकाज को आमजन तक पहुंचाने की टिप्स देने के लिए बुलाई गई बैठक में केन्द्रीय नेताओं ने राजस्थान के नेताओं को एकजुटता का संदेश विशेषरूप से दिया,क्योंकि पिछले लम्बे अर्से से दिल्ली ये खबरें पहुंच रही थी कि पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे समर्थक पार्टी लाइन से अलग चल रहे हैं। पूर्व मंत्री रोहिताश कुमार के खिलाफ तो प्रदेश नेतृत्व को पार्टी से निष्कासित करने की कार्रवाई तक करनी पड़ी।
जानकार सूत्रों के अनुसार बैठक का नाम कोराना प्रबंध के सेवा कार्यों की समीक्षा का दिया गया था,लेकिन असल मकसद विपक्ष से एकजुटता के साथ लोहा लेने की ही मुख्य रूप से कवायद थी। पार्टी संगठन 2023 में होने वाले विधानसभा चुनावों तक राजस्थान में ऐसा होमवर्क चाहती है ताकि पार्टी को प्रचंड बहुमत के साथ सफलता मिले। भाजपा सांसदों में केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव, गजेन्द्र सिंह शेखावत, अर्जुन राम मेघवाल, कैलाश चौधरी तथा अन्य सांसद मौजूद थे। लोकसभाध्यक्ष ओम बिड़ला इस बैठक से लोकासभाध्यक्ष बन जाने के कारण अलग रहे। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को अतिथियों की पंक्ति में स्टेज पर बैठाया गया था। भूपेन्द्र यादव व गजेन्द्र सिंह को भी केबिनेट मंत्री होने के नाते स्टेज पर स्थान मिला। कटारिया व पूनिया थे ही।
बैठक के बाद भाजपा सांसदों के डीनर का आयोजन किया गया जिसमें राजस्थानी रसोई व व्यंजन ही विशेष रूप से परोसे गए। बैठक में शामिल सभी को भूपेन्द्र यादव की ओर से घेवर भेंट की गई। आपकों बता दे कि पिछले माह प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां तीन दिनों तक केन्द्रीय नेतृत्व से मुलाकात के सिलसिले में दिल्ली गए थे तथा राजस्थान प्रभारी अरुण कुमार से जो फीडबैक मिल रहा था उसमें भाजपा के आपसी झगड़ों की ही बातें थी। नड्डा व संतोष को इसीलिए सांसदों की इस बैठक के साथ प्रदेश के प्रमुख नेताओं को बुलाकर समझाईश करनी पड़ी।


