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राजस्थान में सत्ता-संगठन में बदलाव पर लगा उपचुनाव का ग्रहण,फिलहाल टल सकता है मंत्रिमंडल का मसला

जयपुर। राजस्थान में सत्ता-संगठन में बदलावों की तैयारी पर एक बार फिर प्रदेश में होने वाले उप चुनाव की गाज गिर सकती है। चुनाव आयोग ने एक से नामांकन तथा 30 को मतदान के बाद 2 नवम्बर को चुनाव परिणाम का जो कार्यक्रम घोषित किया है उसे देखते हुए उपचुनाव के बीच में मंत्रिमंडल विस्तार तो टलने की प्रबल संभावना बन गई है, क्योंकि सरकार व कांग्रेस पार्टी का पूरा फोकस अब इस् उपचुनावों पर रहेगा।

उपचुनाव के बीच बदलाव के खतरे
मंत्रिमंडल फेरबदल में जिन मंत्रियों के हटाये जाने की चर्चा चल रही है उसके कारण जातीय समीकरण प्रभावित होने का खतरा है तथा उससे भी बड़ा खतरा जो मंत्री नहीं बन पाए उनके असंतोष का है। उसे संभालना कांग्रेस के लिए भारी पड़ सकता है, क्योंकि सभी मंत्री बनाए नहीं जा सकते तथा जो सशक्त दावेदार है उनका नाराज होना स्वभाविक है। विपक्ष भी उपचुनाव बीच बदलाव को मुद्दा बना सकता है।

संगठन में भी होना है बदलाव
कांग्रेस आलाकमान का प्रदेश अध्यक्ष बदलने का जो विचार मंथन है उसके चलते प्रदेश कांग्रेस में नियुक्तियां बेमानी है। जिला व ब्लॉक अध्यक्ष भी इसी कड़ी से जुड़े हैं ऐसे में आला कमान इस बदलाव को नवम्बर तक टाल भी सकता है।

मंत्रियों के बदलने का ये हो सकता है फार्मूला
इस बीच जानकारों की माने तो मंत्रियों को बदलने के तीन तरह के फार्मूलों में से एक पर हाईकमान को फैसला करना है।
मंत्रिमंडल से लेकर संगठन और सरकार के स्तर पर बड़े पैमाने पर फेरबदल कर जनता को मैसेज देने के लिए कांग्रेस हाईकमान सभी मंत्रियों से इस्तीफे लेकर नए सिरे से मंत्रिमंडल बनाने के लिए कह सकता है।

नॉन परफॉर्मर मंत्री हटेंगे
राजस्थान में इन बदलावों को लेकर दिल्ली में लॉबिंग और बैठकों का दौर जारी है, लेकिन हाईकमान के स्तर पर फाइनल फैसला होना बाकी है। गहलोत मंत्रिमंडल के फेरबदल या विस्तार के साथ संगठन में खाली पड़े जिला और ब्लॉक अध्यक्षों के पदों को भी भरा जाना है।

सभी मंत्रियों के इस्तीफे लेने के पीछे सोच है कि नॉन परफॉर्मर मंत्री आसानी से हट जाएंगे, लॉबिंग करने का वक्त नहीं मिलेगा। आगे चुनावों के हिसाब से सभी सियासी समीकरणों को साधना आसान होगा। बताया जा रहा है कि राहुल गांधी आमूलचूल बदलाव चाहते हैं, ताकि चुनावों से पहले सरकार और संगठन में रिजल्ट ओरिएंटेड टीम तैयार हो।

पायलट समर्थकों की हिस्सेदारी पर भी होना है फैसला
सचिन पायलट खेमे के विधायकों को भी मंत्रिमंडल में एडजस्ट करना है। पिछले साल बगावत के बाद सचिन पायलट को डिप्टी सीएम पद से और उनके दो समर्थकों रमेश मीणा और विश्वेंद्र सिंह को कैबिनेट मंत्री पद से बर्खास्त किया गया था। पायलट अब चार से ज्यादा मंत्री पद मांग रहे हैं।

सचिन पायलट को नई जिम्मेदारी का मसला भी होना है तय
राजस्थान के बदलावों में मंत्रिमंडल फेरबदल के साथ सचिन पायलट को संगठन में जिम्मेदारी देने पर भी फैसला होगा। सचिन पायलट दो बार राहुल गांधी से मुलाकात कर चुके हैं। पायलट को राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस में पद दिए जाने पर विचार किया जा रहा है, लेकिन उस पर अभी अंतिम फैसला होना बाकी है। सचिन पायलट के साथ उनके समर्थक नेताओं को भी सत्ता और संगठन में मिलने वाले पदों पर फैसला हेाना है। पिछले साल बगावत के बाद हुई सुलह में तय हुए मुद्दों पर अभी फैसला बाकी है। बताया जा रहा है कि सचिन पायलट ने हाईकमान के सामने मांग रखी है कि पहले उनके समर्थकों को सरकार और संगठन में हिस्सेदारी दी जाए, उसके बाद ही उन्हें कोई जिम्मेदारी देना राजनीतिक तौर पर सही रहेगा।

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