उदयपुर : मेवाड़ की वल्लभनगर सीट पर होने वाला उपचुनाव सबसे ेदिलचस्प होने की संभावना है। इस सीट को लेकर जिस तरह के सियासी समीकरण बन बिगड़ रहे उसने प्रमुख राजनैतिक दलों भाजपा व कांग्रेस के दोनों के घरों में ही कलह पैदा कर डाली हैं। कांग्रेस में जहां शक्तावत परिवार में आपस में ही तलवार खींची हुई है तो भाजपा भी अन्र्तकलह से अछूती नहीं हैं। भाजपा को जनता सेना के संरक्षक रणधीरसिंह भीण्डर के फिर से भाजपा में लौट आने तथा उपचुनाव में उतारे जाने का फोबिया हो गया हैं,जबकि भीण्डर और उनकी जनता सेना पहले ही स्पष्ट कर चुके है कि वे जनता सेना के बैनर तले ही चुनाव लडेंगे। भाजपा से उनका चुनाव लडऩे का कोई इरादा नहीं हैं, लेकिन इस स्पष्टता के बावजूद नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया खेमे को भीण्डर के भाजपा में लौट आने का डर रह रहकर सता रहा है।
कटारिया ने मंगलवार को जो भाजपा के प्रमुख नेताओं की बैठक बुलाई उसमें उन नेताओं को भी स्वयं कटारिया ने फोन करके बुलाया बताया जिनसे पिछले काफी दिनों से दूरी बनाएं हुए थे उनमें प्रमोद सांभर, भंवरसिंह पंवार, संघ के जुड़ी रजनी डांगी, अलका मूंदड़ा आदि शामिल हैं। इन नेताओं ने बकायदा एक प्रस्ताव भी पारित किया। 18 सदस्यों के हस्ताक्षर वाले इस प्रस्ताव में कहा गया कि भीण्डर को छोड़ दूसरा कोई भी नेता वल्लभनगर सीट से मंजूर। साथ ही जीतने का भी दावा किया गया।
भाजपा में अचानक से जनता सेना के रणधीरसिंह भीण्डर को लेकर सरगर्मी तेज होने के पीछे भीण्डर की दिल्ली यात्रा के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से मुलाकात को माना जा रहा है,जबकि इस बारे में भीण्डर का कहना है कि शिष्टाचार मुलाकात की थी। राजे से मिलने का दूसरा कारण था कि उनकी पुत्रवधू की कुशलक्षेम पूछना था। शायद जनता सेना बनाने के बाद भी भीण्डर वसुंधरा राजे को ही अपना आर्दश मानते हैं। उन्होंने पिछले कुछ दिनों तक व्हाट्सएप स्टेट्स पर वसुंधरा राजे के साथ का फोटो लगा रखा था, वह भी विरोधियों को डरा रहा था। हालांकि भाजपा में हुई इस हलचल के बाद राजे के साथ मुलाकात का फोटो व्हाट्सएप स्टेट्स से हटा दिया है।
कांग्रेस विधायक गजेन्द्रसिंह शक्तावत के निधन से खाली हुई वल्लभनगर सीट पर कांग्रेस में स्व. गजेन्द्रसिंह की पत्नी प्रीति शक्तावत, भाई देवेन्द्रसिंह, भाण्जे राजसिंह झाला, एक अन्य निकट पारिवारिक सदस्य कुबेरसिंह के बीच टिकटों को लेकर चल रही जंग सर्वविदित ही हैं। भाजपा को लगता है कि कांग्रेस के इस झगड़े का फायदा उसे मिल सकता है,जबकि जनता सेना इन सब समीकरणों में अपने आपको सुरक्षित महसूस कर रही हैं। जानकारी के अनुसार चार-पांच माह पूर्व जरूर भाजपा नेताओं ने भीण्डर से सम्पर्क कर इस उपचुनाव में भाजपा के लिए सीट छोडऩे को कहा था,लेकिन भीण्डर ने इस शर्त को मानने से साफ इंकार कर दिया। उसके बाद भाजपा से भीण्डर को टिकट का वार्तालाप ही बंद पड़ा है,लेकिन कटारिया ग्रुप हाल में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से हुई मुलाकात के बाद राजनैतिक गलियारों मे चल रही खबरों मात्र से चिंतित हैं।
