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पायलट फिर मुखर हुए: दिल्ली से आते ही टोंक में बोले- नेता तो भाषण देकर चले आते हैं, बूथ पर कार्यकर्ता लड़ता है, उसे राज में भागीदारी दें

पायलट

जयपुर। राजस्थान को लेकर एक तरफ कांग्रेस में मंत्रिमण्डल व राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर दिल्ली में महामंथन हो रहा है तो दूसरी तरफ आला नेताओं से कल ही भेंट कर लौटे पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने फिर गुगली फेंकी हैं और कांग्रेस के विपक्ष में रहते हुए उनके साथ काम करने वाले कार्यकर्ताओं सरकार में पद देने की मांग उठाई । सचिन पायलट ने टोंक में मीडिया से हुई बातचीत का वीडियो देर रात ट्वीट कर अपनी मांगों पर रुख साफ करने के साथ अपने समर्थकों को भी साफ मैसेज देने की कोशिश की है। पायलट ने सुलह कमेटी के समय तय हुए मुद्दों को जल्द पूरा करने और विपक्ष में रहते जिन्होंने काम किया उन्हें मौका देने की पैरवी की है। पायलट ने लंबे समय बाद खुलकर बात रखी है। पायलट का ये वीडियो टोंक सभापति के घर पर मीडिया से बातचीत का है। पायलट सभापति के पिता के निधन पर संवेदना प्रकट करने पहुंचे थे।

कार्यकर्ताओं के मान-सम्मान की बात

पायलट ने वीडियो में कहा- जो बदलाव करने की मांग हम शुरू से करते आए हैं,जहां जरूरत है, मैं फिर दोहरा रहा हूं कि अब लगभग तीन साल हो गए हैं। जो कांग्रेस के वर्कर हैं और जिन्होंने कांग्रेस के लिए सब कुछ कुर्बान किया उन्हें राज में भागीदारी मिलनी चाहिए। हम नेता लोग तो भाषण देकर आते हैं, लेकिन कार्यकर्ता बूथ पर कांग्रेस का झंडा उठाकर लड़ाई लड़ते हैं। उन लोगों को मान सम्मान देने की लड़ाई और संघर्ष की बात मैंने रखी थी और उस पर मैं आज भी कायम हूं।

चुनाव 22 महीने दूर, अब जल्दी फैसला हो

पूर्व उपमुख्यमंत्री ने कहा- चाहे राजनीतिक नियुक्तियां हों या भागीदारी की बात हो जिन्होंने समर्पित भाव से भाजपा की सरकार को हराने का काम किया है,इतने सारे वर्कर्स को लगना चाहिए कि सरकार में हमारी भागीदारी है। इस भागीदारी को सुनश्चित करने की बात प्रदेशाध्यक्ष भी कहते रहते हैं और मैं भी कहता रहता हूं। मुझे लगता है बहुत जल्द यह करना चाहिए,क्योंकि राजस्थान में चुनाव 22—23 महीने दूर रह गया है।

कांग्रेस विधायकों को पद देने की मांग भी उठाई

सचिन पायलट ने वीडियो में बीजेपी राज में संघर्ष करने वाले कांग्रेस कार्यकर्ताओं को राजनीतिक नियुक्तियों से लेकर मंत्रिमंडल में पद देने की पैरवी की है। पायलट ने यह जताने का प्रयास किया कि वे उनके लिए अब भी लड़ रहे हैं। पायलट कैंप का मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से टकराव का यह भी मुद्दा रहा है,क्योंकि गहलोत निर्दलीयों, बसपा से कांग्रेस में आने वालों को मंत्री बनाने से लेकर राजनीतिक नियुक्तियों में भागीदारी देना चाहते हैं जबकि पायलट शुरू से ही इसके खिलाफ है।

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