जयपुर। राजस्थान में राजनीतिक दृष्टि से यह सप्ताह काफी उथल-पूथल भरा रह सकता हैं। पंचायत व जिला परिषद सदस्यों के लिए वोट गिरते ही मंत्रिमण्डल फेरबदल की गतिविधियां तेज होने की संभावना हैँ। यहां तक कयास लगाए जा रहे हैँ कि सब कुछ ठीक रहा तो अगले चार-पांच दिन में नए मंत्रियों को शपथ दिलवाई जा सकती है। राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर मंत्रिमण्डल को लेकर ही चर्चाओं का बाजार गर्म हैं।
मुख्यमंत्री के यहां चाहे भले ही इस सारी कवायद को गोपनीय रखा जा रहा हो,लेकिन राजनैतिक हलकों में जो खबरें छन-छन कर बाहर आ रही है उससे तो यहीं लग रहा हैं कि इस बार मंत्रिमण्डल फेरबदल हो जाएगा। तबादलों को अंतिम रूप देने में लगे मंत्रियों ने भी इन संकेतों के बाद ही अपनी गतिविधियों को रोक सा दिया है।
विधानसभा सत्र से पूर्व मंत्रिमण्डल की उम्मीद
राजस्थान के प्रभारी महामंत्री अजय माकन तथा कल पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के बयानों को भी इससे जोड़कर देखा जा रहा हैं।राज्य विधानसभा का बजट सत्र भी 9 सितम्बर से प्रस्तावित है लिहाजा माना जा रहा है कि चार-पांच दिन के भीतर मंत्रिमण्डल का बहुप्रतिक्षित फैसला हो ही जाएगा ताकि नए बने मंत्रियों को विधानसभा में विपक्ष का सामना करने की तैयारी का कुछ समय मिल सके।
यह अलग बात है कि ये मानसून सत्र ज्यादा लम्बा चलने वाला नहीं हैँ। विधानसभा का सत्रावसान नहीं होने के कारण प्रश्नकाल भी नहीं होना हैँ। मंत्रियों की सबसे अधिक खिंचाई प्रश्नकाल में ही होती हैं। इस सत्र में सरकार को जिन बिलों को पारित करवाना है उस पर होने वाली चर्चा का जवाब वैसे भी शांति धारीवाल जैसे वरिष्ठ मंत्रियों को देना हैं।
शामिल होने वाले चेहरों को लेकर कयास
मंत्रिमण्डल में शामिल किए जाने वाले चेहरों को लेकर भी अलग-अलग कयास लगाए जा रहे है पर मोटे-तौर पर माना जा रहा है कि 8 से 9 मंत्री लिए जाने की ही अधिक संभावना हैं। इसके अलावा विधायको को संतुष्ट करने के लिए संसदीय सचिव तथा इस सत्र में विधानसभा उपाध्यक्ष का फैसला भी हो जाएगा। किन्हें मंत्री बनाया जाएगा इसके पत्ते ना तो अभी तक संचिन पायलट ने खोले है और ना ही मुख्यमंत्री की तरफ से किसी विधायक को ये संकेत अभी तक दिए गए है कि उक्त विधायक को मंत्री बनाया जा रहा है।
सबकी नजर 8 नम्बर बंगले से आने वाले बुलावे पर ही टिकी हुई हैं। बताते है कि मुख्यमंत्री ने अपने स्तर पर होमवर्क पूरा कर लिया है। मंत्रिमण्डल के संभावित फेरबदल की संभावना को देखते हुए ही गहलोत-पायलट दोनों की गुट चुपी मनाएं हुए हैं।
