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अगर कांग्रेस ना होती तो इमरजेंसी न झेलनी पड़ती, परिवारवाद ना होता

कांग्रेस

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण का जवाब देने के दौरान सोमवार के ही मूड में दिखे। आज भी पीएम मोदी कांग्रेस की नीतियों से लेकर उसके विचारों पर लगातार हमले करते रहे। उन्होंने कांग्रेस शासन काल की महंगाई, जातिवाद, सिखों के नरसंहार और विकास का जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा कि यहां पर कहा गया कि कांग्रेस न होती तो क्या होता। ‘इंडिया इज इंदिरा, इंदिरा इज इंडिया’ की सोच का परिणाम है। महात्मा गांधी की इच्छा थी कि कांग्रेस न रहे। वह जानते थे कि इसका क्या होने वाला है। इसलिए वह कांग्रेस को खत्म करना चाहते थे।’

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिन्होंने देश में इमरजेंसी लगाई, वे लोकतंत्र पर चर्चा कर रहे हैं। इमरजेंसी में लोकतंत्र का गला घोंटा गया। उधर, राज्य सभा में सभी संशोधन खारिज होने के बाद राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया है। पीएम मोदी ने अपने जवाब में कहा, ‘अगर कांग्रेस न होती, तो देश पर इमरजेंसी का कलंक न लगता। कांग्रेस न होती, तो जातिवाद की खाई न होती। कांग्रेस न होती, तो सिखों का नरसंहार न होता।’ मोदी यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सोच पर अर्बन नक्सलियों ने कब्जा कर लिया है।

उन्होंने कहा, ‘परिवारवाद लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है। कांग्रेस की परेशानी ये है कि उन्होंने डायनेस्टी के आगे कुछ सोचा ही नहीं। जब टेलेंट पर परिवार हावी होता है, तो यह दिखाई देता है। कांग्रेस न होती, तो राजनीति परिवारवाद से मुक्त होती। कांग्रेस न होती, तो भारत विदेशी चश्मे के बजाए स्वदेशी संकल्पों के रास्ते पर चलता। कांग्रेस न होती, तो दशकों तक भ्रष्टाचार को संस्थागत बनाकर नहीं रखा जाता।’ अगर कांग्रेस न होती तो लोकतंत्र परिवारवाद से मुक्त होता, भारत विदेशी चस्पे के बजाय स्वदेशी संकल्पों के रास्ते पर चलता।

मोदी ने कहा कि मैं गिनता रहूंगा। कांग्रेस जब सत्ता में रही तो देश का विकास नहीं होने दिया। अब जब विपक्ष में है तब देश के विकास में बाधा डाल रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अब नेशन पर आपत्ति है। नेशन गैर संवैधानिक है, तो आपकी पार्टी का नाम इंडियन नेशनल कांग्रेस क्यों रखा गया। अबकी बार यह नई सोच आई है तो इसका नाम बदल दीजिए। अपने पूर्वजों की गलती सुधार दीजिए।

अटलजी की कविता सुनाई

PM ने कहा- इस कोरोना काल में दुनिया को दवाई पहुंचाने की बात हो या पर्यावरण संरक्षण की बात हो, भारत की लीडरशिप की दुनिया में चर्चा है। जब संकट का काल होता है, तो चुनौतियां बहुत होती हैं। उस समय दुनिया की पूरी ताकत अपने बचाव में जुटी होती है। ऐसे में मुझे अटल बिहारी जी कविता की पंक्तियां याद आ रही हैं:

व्याप्त हुआ बर्बर अंधियारा
किंतु चीर कर तम की छाती
चमका हिंदुस्तान हमारा।

शत-शत आघातों को सहकर
जीवित हिंदुस्तान हमारा।

जग के मस्तक पर रोली सा
शोभित हिंदुस्तान हमारा।

 

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