जयपुर। भाजपा ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए राजस्थान के इतिहास की सबसे नकारा व जनविरोधी सरकार बताया और कहा है कि कांग्रेस के 3 वर्षीय कुशासन में राजस्थान महिला दुष्कर्म, भ्रष्टाचार, बच्चों की तस्करी व बेरोजगारी के कारण आत्महत्या के मामलों में देश में पहले तथा बेरोजगारी में नम्बर दो पर पहुंच गया हैं। भाजपा कार्यसमिति की बैठक में आज पारित राजनैतिक प्रस्ताव में गहलोत सरकार को निकम्मी, जनविरोधी व अंतर्कलह से जूझती सरकार बताते हुए जनता से भी सदन से लेकर सड़क तक आंदोलन में सहयोग का आह्वान किया गया है। भाजपा ने कहा है कि वह किसानों की कर्जमाफी बेरोजगारी जैसे ज्वलंत मुद्दों को लेकर आगामी दिनों में विराट जनआक्रोश रैली का आयोजन कर सरकार के विरूद्ध जनता की आवाज बुलन्द करेगी।
मोदी सरकार की तारीफ,गहलोत की आलोचना
दस पृष्ठों के राजनैतिक प्रस्ताव में केन्द्र की मोदी सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए जमकर तारीफ की गई है,वहीं प्रदेश की गहलोत सरकार को कोसते हुए अंतद्र्वंद्व की गिरफ्त में लंगड़ा जनादेश बताया गया हैं। प्रस्ताव में गहलोत सरकार पर प्रहार करते हुए कहा गया है कि सरकार की नींव ही भारी अंतर्कलह पर टिकी थी जिसका ही परिणाम रहा है कि सरकार को 34 दिनों तक होटल में कैद रहना पड़ा। जब वैश्विक महामारी कोरोना काल में जनता को सरकार की सबसे ज्यादा जरूरत थी तब सरकार खुद के अस्तित्व को बचाने में जूझ रही थी। वहीं 18 माह तक मुख्यमंत्री अपने निवास में बंद रहे व मुख्यमंत्री कार्यालय के दरवाजे को जनता के लिए बंद कर दिए गए। साथ ही 3 वर्ष के कालखंड में प्रदेश में अराजकता चरम पर है। महिलाओं, दलितों, वंचितों पर अत्याचार बेतहाशा बढ़ रहा है। प्रदेश को शर्मसार करने वाली अनेकों घटनाएं प्रतिदिन घट रही है।
उठता असंतोष का धुंआ
भाजपा ने कहा है कि प्रदेश की जनता दहशत में है,अपराधियों के हौंसले बुलंद है, सरकार का इकबाल खत्म है, प्रदेश की जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है, दूसरी तरफ आंतरिक संघर्ष से जूझ रही व सत्ता के मद में चूर कांग्रेस सरकार बेपरवाह होकर भ्रष्टाचार के नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। 3 वर्ष बाद भयंकर रस्साकस्शी के बाद हुए मंत्रिमण्डल पुनर्गठन व अवैधानिक रूप से 6 सलाहकारों की नियुक्ति के बाद उठता असंतोष का धुंआ कब विकराल रूप ले, यह भविष्य के गर्भ में है।
हैरान, परेशान किसान
राजनैतिक प्रस्ताव में किसानों की चर्चा करते हुए कहा गया है कि राज्य की कांग्रेस सरकार किसानों का ऋण माफ करने के अपने चुनावी जन घोषणा पत्र से पलट ही चुकी है। सहकारी बैंकों से किसान को मिलने वाले फसली ऋण को लगभग बंद कर चुकी है, जिसकी वजह से दु:खी होकर कई सारे किसान आत्महत्या कर चुके है। फार्म पौण्ड, टांका, जैविक खेती पर पूर्ववर्ती सरकार की ओर से मिलने वाली सब्सिडी को भी यह सरकार बंद कर चुकी है। भाजपा की पूर्ववर्ती सरकार ने किसानों को सिंचाई की बिजली पर सालाना 10 हजार रूपये की सब्सिडी देने की शुरूआत की थी जिसे भी इस सरकार ने आते ही बंद कर दिया। ठंड में किसान को सिंचाई के लिए रात में बिजली सरकार दे रही है जिसकी वजह से पिछली सर्दी में कई किसानों की जान जा चुकी व सैकड़ों किसान बीमार हो गए थे। इस बार भी सरकार ने सर्दी की शुरूआत से ही इसे जारी रखा है। किसानों को विद्युत बिलों में 1000 रू. प्रतिमाह एवं अधिकतम 12000 रू. प्रतिवर्ष का अतिरिक्त अनुदान की थोथी घोषणा तो कर डाली, लेकिन वास्तविकता में प्रदेशभर में आज तक योजना में एक भी किसान को अनुदान का लाभ नहीं मिल सका है।इसी प्रकार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में समय पर राज्यांश नहीं देने का जिक्र करते हुए कहा गया है कि इसके चलते वर्ष 2019-20 व 2020-21 की रबी व खरीफ की फसलों का लाखों किसानों का मुआवजा अभी भी लम्बित है।
किसान ऋणमाफी
राज्य सरकार ने प्रदेश के किसानों का सम्पूर्ण कृषि ऋण 10 दिनों के भीतर माफ करने की घोषणा राहुल गाँधी से राजस्थान में करवाई जो अब धूलदर्शित साबित हो चुकी है। जहां एक ओर ऊँट के मुँह में जीरा समान फसली ऋण माफ करने को लेकर किसानों को गुमराह करने में 3 वर्ष से सरकार जुटी है वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीयकृत/ग्रामीण/वाणिज्यिक बैंकों/किसान क्रेडिट कार्ड से जिन 22 लाख किसानों ने फसली ऋण लिया तथा जिनके फसली ऋण को माफ करने की घोषणा विधानसभा में करके कल्ला कमेटी बनाई गई थी उसका नतीजा ढाक के तीन पात रहा। प्रदेश के किसानों को सम्पूर्ण ऋणमाफी के नाम पर तो धोखा दिया ही था अब पिछले 3 वर्षों में नये कृषकों को सहकारी ऋण मिलना भी लगभग बंद हो गया है।
बाजरा एवं किसानों से धोखाधड़ी
राजस्थान में देश का सर्वाधिक बाजरा उत्पादन होता है। केन्द्र सरकार ने देश में बाजरे की एमआरपी को 2250 रुपये प्रति क्विंटल कर दी, लेकिन प्रदेश में बाजरे की खरीद एमएसपी पर हुई ही नहीं, जिससे प्रदेश का किसान अपने बाजरे को बाजार में 1400 रुपये प्रति क्विंटल में बेचने को मजबूर हुआ।
मंहगी बिजली-मंहगा पानी
चुनाव के समय बिजली-पानी की दरें नहीं बढ़ाने का वादा कर सत्ता में आई कांग्रेस सरकार अब तक 9 बार फ्यूल चार्ज और स्थायी शुल्क के नाम पर विद्युत दरें बढ़ाकर प्रदेश के एक करोड़ 52 लाख बिजली उपभोक्ताओं की जेब पर डाका डाल चुकी है। आज पूरे देश में सबसे मंहगी बिजली राजस्थान के विद्युत उपभोक्ताओं को मिल रही है। प्रदेश में वर्तमान में 39 हजार से ज्यादा घोषित ढाणियां है,लेकिन 3 वर्ष के कालखंड में प्रदेश की एक भी ढ़ाणी में बिजली नहीं पहुँची।
प्रदेश के 16 जिलों में दूषित पानी पीने के लिए आमजन मजबूर है । जल जीवन मिशन की गति भी देशभर में सर्वाधिक राजस्थान में कम है।
युवाओं से धोखा-अपनों को मौका
राजनैतिक प्रस्ताव में नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आँकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया है कि बेरोजगारी के कारण आत्महत्या करने के मामले में राजस्थान देश में नम्बर 1 पर है। 30 प्रतिशत से ज्यादा भर्तियां लम्बित है। जितनी भी भर्तियां निकाली वह विवादित रही और अधिकतर के पेपर लीक हुए। यहाँ तक की आरपीएससी के इंटरव्यू में सरकार से जुड़े मंत्री व नेताओं के रिश्तेदारों को निर्लज्जता से फायदा पहुँचाया गया।
हैरानी की बात है कि यूपी में आयोजित शिक्षक भर्ती पात्रता परीक्षा में गड़बड़ी सामने आने पर जहां यूपी सरकार ने उसे निरस्त कर दोषियों की सम्पत्ति जब्त कर बुलडोजर चला चुकी है, वहीं राजस्थान में रीट परीक्षा के लीक होने के तमाम सबूतों तथा 22 लोगों की गिरफ्तारी के बावजूद सभी पहलुओं को दरकिनार करते हुए राज्य सरकार रीट की परीक्षा निरस्त नहीं कर रही है और सत्ता से जुड़े पेपर माफियाओं को बचाने में लगी है। कांग्रेस ने अपने जन घोषणा पत्र में प्रदेश में कार्यरत संविदाकर्मियों को नियमित करने का वादा किया था जिसे पूरा करने के लिए मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला की अध्यक्षता में एक कैबिनेट सब-कमेटी का गठन किया गया लेकिन आज 3 वर्ष गुजरने के दौरान संविदाकर्मी नियमितिकरण की बाट जोह रहे हैं।
राज्य में आकंठ भ्रष्टाचार
भाजपा के इस प्रस्ताव में कहा गया है कि राजस्थान में भ्रष्टाचार दीमक की तरह फैल कर समूचे सरकारी तंत्र को खोखला कर रहा है। राजस्थान में शिक्षा, पुलिस, चिकित्सा, परिवहन, खनन, पंचायती राज एवं बिजली विभाग सहित शायद ही कोई सरकारी विभाग हो जहां भ्रष्टाचार की गंगोत्री ना बह रही हो। खुद सरकार के विधायक ही पत्र लिखकर भ्रष्टाचार के मामलों को उजागर कर रहे हैं लेकिन सरकार अपने विधायकों की भी नहीं सुन रही है। प्रस्ताव में मुख्यमंत्री की ओर से शिक्षक सम्मान समारोह में पूछे गए तबादलों के सवाल का भी जिक्र किया गया है और कहा गया है कि जिन शिक्षा मंत्री की पोल शिक्षकों ने खोली वो उनके पास आज प्रदेश कांग्रेस की कमान है।
स्वास्थ्य सुविधाओं के हाल बेहाल
कोरोना काल में गत 2 वर्षों में राजस्थान कोरोना, डेंगू, स्वाइन फ्लू जैसे गम्भीर बीमारियों से जूझ रहा है। प्रदेश में सख्त वैक्सीनेशन के आदेश हवा-हवाई हो रहे हैं और अब तक मात्र 31 प्रतिशत आबादी को ही दोनों डोज लगी है। पिछले 2 वर्षों में प्रदेश के हर बड़े अस्पताल में सैकड़ों नवजात बच्चों ने दम तोड़ दिया। पूर्व चिकित्सा मंत्री का जिक्र करते हुए कहा गया है कि सरकार के चिकित्सा मंत्री स्वास्थ्य सेवाओं को दुरूस्त करने के बजाय रेड कारपेट पर स्वागत कराने एवं फिल्म अभिनेता के बॉडीगार्ड के साथ फोटो खींचवाने में चिकित्सा मंत्री मशगूल रहे।
वसुंधरा राजे की तारीफ
भाजपा ने अपने राजनैतिक प्रस्ताव में वसुंधरा राजे कार्यकाल की प्रशंसा करते हुए कहा गया है कि पूर्ववर्ती भाजपा की सरकार के समय राज्य में चहुंमुखी विकास हो रहा था। कांग्रेस सरकार ने विकास की उन योजनाओं को बंद कर प्रदेश का विकास ठप्प कर दिया है। किसी बड़ी परियोजना की आधारशिला तक नहीं रखी। खुद के द्वारा घोषित तीनों बजटों की 60 प्रतिशत घोषणाऐं अधूरी है। राज्य की कांग्रेस सरकार जहां अपने 3 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाने की तैयारी कर रही है वहीं शहरी निकायों एवं ग्रामीण क्षेत्रों का विकास पूर्णतया ठप्प है।
राजस्थान में सड़कों के लिए राज्य सरकार द्वारा किसी प्रकार के नये बजट का आवंटन नहीं किया गया। जबकि केन्द्र सरकार लगातार राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण पर पूरी तरह अपना कीर्तिमान स्थापित करती आ रही है। कांग्रेस की प्रस्तावित 12 दिसम्बर की जयपुर रैली का जिक्र करते हुए प्रस्ताव में कहा गया है कि गहलोत ”महंगाई हटाओ रैली ” आयेाजित कर दिल्ली दरबार में अपनी ताकत का प्रदर्शन करने की तैयारी में है जबकि वास्तविकता में कांग्रेस ही महंगाई की जननी है। कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन को लेकर राज्य की चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं को पुख्ता करने की बजाय सरकारी अमला रैली को सफल बनाने में लगा हुआ है और प्रदेश की जनता को भगवान भरोसे छोड़ रखा है।
प्रस्ताव में प्रशासन गाँवों-शहरों के संग की आलोचना करते हुए कहा यया है कि ये गांवों व शहरों के संग नहीं होकर रिश्तेदारों के संग अभियान दिखाई देेता हैं। शिक्षा व्यवस्था को भी बदहाल बताया गया हैं।
अपराध बेलगाम, मदमस्त हुक्मरान
राजस्थान में इस सरकार के बनने के बाद पहले 34 महीनों में कुल 6 लाख 10 हजार 923 मुकदमें दर्ज हो चुके है। जिनमें महिलाओं के खिलाफ होने वाले अत्याचार के 1 लाख 11 हजार 904 मुकदमें दर्ज है। बलात्कार के 17016 मुकदमें, दलितों पर अत्याचार के 20547 एवं आदिवासियों पर अत्याचार के 5665 मुकदमें प्रदेश के थानों में दर्ज हो चुके हैं। यह प्रदेश की जर्जर कानून व्यवस्था का काला इतिहास दिखाता है।
भाजपा ने अपने राजनैतिक प्रस्ताव में सरकार के कामकाज को लेकर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि राजस्थान की कांग्रेस सरकार की अंतर्कलह के कारण प्रदेश में कांग्रेस व कांग्रेस समर्थित विधायकों को जिस प्रकार मिनी मुख्यमंत्री की तरह अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र में सभी प्रकार के प्रशासनिक अधिकार देकर भ्रष्टाचार की छूट दे रखी है। गहलोत को राजस्थान के इतिहास का सबसे कमजोर मुख्यमंत्री बताया गया है।



