नई दिल्ली : केंद्र सरकार की ओर से जारी नई गाइडलाइन बच्चों का स्कूल आना अनिवार्य होगा या ऑनलाइन क्लास कर सकते हैं, यह निर्णय लेने का अधिकार राज्य सरकारों पर छोड़ा गया है। गाइडलाइन में कहा गया कि राज्य स्थानीय स्थिति के आधार पर स्कूल खोलने का निर्णय ले सकते हैं। बच्चों के स्कूल जाने पर फैसला पेरेंट्स से बात करके होगा। बच्चे यदि स्कूल नहीं आना चाहते हैं तो उपस्थिति को लेकर छूट दी जाए। केंद्र सरकार ने कहा है कि अगर स्कूल में पर्याप्त जगह है तो बच्चों को खेल-कूद, गीत-संगीत सहित अन्य एक्टिविटी की छूट होगी। स्कूल के समय को कम किया जा सकता है। क्लास रूम में दो विद्यार्थियों के बीच की दूरी कम से कम छह फीट होनी चाहिए। यदि कोई स्टाफ कंटेनमेंट जोन में रहता हो तो उसे स्कूल आने की इजाजत नहीं होगी।
नीति आयोग के सदस्य वी.के.पॉल के मुताबिक, कोविड-19 के नए मामलों में लगातार गिरावट देखने को मिली है और पहले से स्थिति में सुधार आया है। देशभर के 268 जिलों में कोविड पॉजिटिव रेट 5% से कम है। इन जिलों में स्पष्ट रूप से स्कूलों को फिर से खोलने की दिशा में बढ़ा जा सकता है। इस संबंध में फैसला राज्य सरकारों को करना होगा। जिसके बाद राज्य चाहे तो स्कूलों को फिर से खोल सकती है।
इधर, शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने एक बयान जारी कर कहा है कि 11 राज्यों में स्कूल पूरी तरह से खुले हैं, जबकि 16 राज्यों में ज्यादातर उच्च कक्षाओं के स्कूलों को खोल दिया गया है। वहीं, 9 राज्य ऐसे हैं जहां स्कूल बंद हैं। इस बीच केंद्र सरकार ने इस संबंध में एक नई और संशोधित गाइडलाइन और कोविड प्रोटोकॉल जारी किया है। इन सभी प्रोटोकॉल का पालन स्कूल खोलने के दौरान किया जाएगा।
करीब 95% स्कूल स्टाफ का वैक्सीनेशन
अधिकारियों के मुताबिक, सभी राज्यों में करीब 95% स्कूल स्टाफ का वैक्सीनेशन किया गया है, जबकि कुछ राज्यों के कर्मचारियों की वैक्सीनेशन दर 100% है। ऐसे में अब शिक्षक खुद को सुरक्षित महसूस कर सकते हैं। केंद्र ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सलाह देते हुए कहा कि इन कोविड एसओपी और गाइडलाइंस को पालन करने के साथ हम ये सुनिश्चित कर सकते हैं कि स्कूलों का संचालन सुरक्षित तरीके से किया जा सके।
शिक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव स्वीटी चांगसन ने कहा कि व्यापक वैक्सीनेशन को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय ने पिछले साल दिसंबर में राज्यों के लिए गाइडलाइन जारी की थी। जिसमें बच्चों को स्कूल भेजने के लिए राज्य सरकारों को बच्चे के माता-पिता की सहमति लेनी होगी।
स्कूलों के लिए नई गाइडलाइंस
- छात्रों के बीच कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखना
- स्कूल में उचित सफाई और स्वच्छता सुविधाओं को सुनिश्चित हो
- स्टाफ रूम, ऑफिस एरिया, असेंबली हॉल और अन्य कॉमन एरिया में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो
- स्कूलों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी स्कूल कार्यक्रम न करें जहां सोशल डिस्टेंसिंग संभव न हो
- सभी छात्रों और कर्मचारियों को फेस कवर/मास्क पहनकर स्कूल आना होगा
- मिड-डे मील के वितरण के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग को बनाना होगा
