नई दिल्ली: आगामी अफीम नीति में किसानों को राहत पहुंचाने का प्रयास होंने चाहिए। उक्त बात चित्तौड़गढ़ सांसद सी.पी.जोशी ने आगामी अफीम नीति में किसानों को राहत देने के विभिन्न सुझावों के लिये केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक के दौरान कहीं। सांसद जोशी ने बैठक के दौरान अपने सुझाव पत्र में कहा कि अफीम किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुये सुझावों का समावेश आगामी अफीम नीति (2021-22) में करने की आवश्यकता हैं।
उन्होंने कहा कि अफीम खेती में अनियमितताओं में संबधित अधिकारीयों पर कठोर कार्यवाही की जाये तथा इससे जुड़े सब लोगो की जांच करवाकर उनके खिलाफ भी कार्यवाही की जाये। सांसद ने कहा कि वर्तमान समय में अफीम खेती में लागत की अपेक्षा काफी कम दाम किसानों को मिल रहे अतः अफीम फसल का मूल्य बढ़ाया जाये। उन्होंने बताया कि वर्ष 1998 से अभी तक के सभी प्रकार के पट्टे घटीया मार्फीन से हो या कम औसत से हो या अन्य किसी प्रकार से कटे हों उन्हे बहाल किया जाये।
लाईसेंस पात्रता की सूचना लिखित में दी जावें
सांसद ने कहा कि अफीम का रकबा यानि क्षेत्रफल को समान रूप से बराबर आवंटित किया जाये। उन्होंने सुझाव दिए कि दैनिक तौल को बन्द कर दिया जाना चाहिये क्योंकि अफीम निकालते समय अफीम में पानी की मात्रा होती है। समय के साथ ही पानी सुखता रहता हैं एवं अफीम का वजन कम होता जाता है। उन्होंने कहा कि जिन किसानों को अफीम लाईसेंस के लिये पात्र माना गया हैं उन किसानों को विभाग के द्वारा लाईसेंस पात्रता की सूचना लिखित में दी जावें। किसान यदि फसल बोना नही चाहता हैं तो यह किसान से लिखित में लिया जाये तथा यह जिम्मेदारी विभाग की होनी चाहिये।
सांसद ने बताया कि अफीम तौल केन्द्र पर ही अफीम जाँच का अंतिम परिणाम प्राप्त हो सके ऐसी प्रक्रिया अपनाई जाये।
सांसद ने कहा कि अफीम फसल बुवाई के 45 दिनों के अन्दर गिरदावरी कार्य पूर्ण कर लिया जाये। विगत वर्ष में जिन किसानों को लाईसेंस तो मिल गये लेकिन किसी कारणवश फसल बो नही पाये, ऐसे किसान उसी वर्ष फसल बोने की शर्त के कारण वचित रह गये, उन्हे भी इसी वर्ष फसल बाने की अनुमति प्रदान कि जाये।
लाईसेंस की बजाय उसकी उपज के अनुसार अफीम लाईसेंस जारी करवाए
जोशी ने प्रत्येक किसान के अफीम लाईसेंस को दो भुखण्डो में बोने का नियम जो पिछले साल के अलावा सभी विगत वर्षो से चला आ रहा है,उसे पुनः लागू करवाया जाये। किसान की मृत्यु के उपरान्त नामान्तरण के बाद न्यूनतम क्षेत्र के लाईसेंस की बजाय उसकी उपज(योग्यता) के अनुसार अफीम लाईसेंस जारी करवाया जाये। उन्होंने 2016-17 में रोके गये 83 काश्तकारों को लाईसेंस दिलाये जाने के संबध में मंत्रालय के द्वारा जारी आदेश दिनांक 11.12.2017 को विड्रो करते हुये उन 83 काश्तकारों को उनके 50 ग्राम अफीम नमूने की जांच रिपार्ट के आधार पर लाईसेंस जारी कराया जावे।1999 से 2003 तक की अवधि में घटीया यानि कम मार्फीन के कारण रूके हुये पट्टों को दिलवाया जाये जिसमें एम.एस.कन्टेन्ट 4.00 किग्रा/है. को आधार माना जाये। इस बैठक में केन्द्रीय वित्तराज्य मंत्री के साथ मन्दसौर सांसद सूधीर गुप्ता, धमेन्द्र कुमार कश्यप, उपेन्द्र सिंह रावत के साथ नारकोटिक्स डायरेक्टर ,नारकोटिक्स कमीश्नर, सी.सी.एफ व वित्त मंत्रालय के अधिकारी भी उपस्थित रहे।
