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NTAGI चीफ ने बताया: क्यों लिया कोविशील्ड की दो डोज के बीच गैप का फैसला

NTAGI Chief told: Why took the decision of gap between two doses of Covishield

नई दिल्ली: कोरोना वायरस की वैक्सीन कोविशील्ड की दूसरी डोज़ लेने के लिए टाइम गैप बढ़ाने के फैसले पर नेशनल टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप ऑन इम्यूनिसेशन (NTAGI) के डॉ. एनके अरोड़ा का बयान सामने आया है। डॉ. अरोड़ा ने इंग्लैंड का उदाहरण देते हुए सरकार के इस निर्णय को सही बताया है। वैज्ञानिक साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर सरकार ने कोविशील्ड की दो डोज के बीच अंतराल बढ़ाने का फैसला लिया।

उन्होंने कहा है कि इंग्लैंड का डेटा सामने आने पर पता चला है कि 12 हफ्ते का गैप रखने पर वैक्सीनेशन का रिजल्ट 65% से 88% तक अच्छा मिला। वहां इसका काफी फायदा हुआ। इसलिए भारत में वैक्सीनेशन के गैप को बढ़ाकर 12 से 16 हफ्ते कर दिया गया। डॉ. अरोड़ा ने कहा है कि ये फैसला वैज्ञानिक आधार पर लिया गया है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक ट्वीट के अनुसार अरोड़ा ने कहा कि टीकाकरण के इस फैसले को लेकर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजीआई) के सदस्यों के बीच कोई असहमति नहीं थी। बता दें कि सरकार ने 13 मई को कहा था कि उसने कोरोना वर्किंग ग्रुप की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है और कोविशील्ड वैक्सीन की दो खुराक के बीच के अंतर को 6-8 सप्ताह से बढ़ाकर 12-16 सप्ताह कर दिया है।

विदेश यात्रा पर जाने वालों को 28 दिन बाद दूसरा डोज
  • इससे पहले स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोवीशील्ड के वैक्सीनेशन शेड्यूल में बदलाव किया था। दूसरे डोज का गैप दो बार बढ़ाने के बाद अब इसे विदेश यात्रा पर जा रहे लोगों के लिए घटाया गया था। कुछ कैटेगरी में दो डोज के लिए 84 दिन (12-16 हफ्ते) का इंतजार करने की जरूरत नहीं है। 28 दिन (4-6 हफ्ते) बाद भी दूसरा डोज लगवा सकते हैं। दो डोज का गैप सिर्फ कोवीशील्ड के लिए घटाया गया था। कोवैक्सिन के 2 डोज का गैप 28 दिन था। उसमें कोई बदलाव नहीं किया गया।
  • नई गाइडलाइन उन लोगों के लिए है जिन्हें पहला डोज लग चुका है और उन्हें अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर जाना है। यह यात्रा उन्हें पढ़ाई, रोजगार या ओलिंपिक टीम के हिस्से के तौर पर करनी पड़ सकती है। ऐसे लोगों को कोवीशील्ड के दूसरे डोज के लिए 84 दिन का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। वे इससे पहले भी दूसरा डोज लगवा सकते हैं।
कोवीशील्ड की डोजिंग पॉलिसी में बदलाव क्यों 
  • यह बदलाव भारत के बाहर यात्रा कर रहे लोगों के लिए जारी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOPs) में किया गया है। दरअसल, कोवीशील्ड को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और ब्रिटिश कंपनी एस्ट्राजेनेका ने मिलकर विकसित किया है। इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) अपनी मंजूरी दे चुका है। ऐसे में इसके दो डोज लगे होने पर लोग भारत के बाहर सुरक्षित यात्रा कर सकते हैं। उन्हें इन्फेक्शन होने का खतरा कम होगा। साथ ही वे नए तेजी से फैलने वाले म्यूटेंट वायरस स्ट्रेन्स से भी सुरक्षित रहेंगे।
  • यह पॉलिसी सभी पर लागू नहीं होगी। अगर कोई व्यक्ति 84 दिनों के अंदर विदेश जाने वाला हो तो ही जल्दी दूसरा डोज लगाया जा सकेगा। अन्य लोगों को यह राहत नहीं मिलने वाली। उन्हें दूसरा डोज लेने के लिए 84 दिनों का इंतजार करना ही होगा।

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