जयपुर। जाने माने न्यूरोलॉजिस्ट पद्मश्री डॉ. अशोक पनगड़िया का निधन हो गया। पनगड़िया पोस्ट काेविड बीमारी से जूझ रहे थे और लंबे समय से वे वेंटिलेटर पर थे। उनकी स्थिति ज्यादा खराब होने के बाद दोपहर करीब 2.30 बजे उन्हें जयपुर स्थित EHCC अस्पताल से उनके निवास पर वेंटिलेटर सपोर्ट पर ही लाया गया था, लेकिन करीब सवा घंटे बाद दोपहर 3:50 मिनट पर डॉक्टरों ने उनको मृत घोषित कर दिया। डॉ. पनगड़िया पिछले काफी दिनों से कोरोना से पीड़ित होने के बाद से भर्ती थे।
उनकी हालात बिगड़ने पर मेदांता अस्पताल गुरुग्राम एयर लिफ्ट की भी तैयारी थी, लेकिन उनकी स्थिति ज्यादा बिगड़ गई इस कारण उन्हें शिफ्ट नहीं किया जा सका।
चिकित्सको के अनुसार उनके ब्रेन में फंगस आ गया था। उसके बाद वे कोमा में चले गए। वे वेंटिलेटर पर थे। ईएचसीसी के चिकित्सकों की टीम देश-विदेश के विशेषज्ञों के साथ संपर्क कर बेहतर उपचार में जुटी थी, लेकिन बचाया नहीं जा सका। आज ही उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। डॉ. पनगड़िया नीति आयोग के पूर्व अध्यक्ष अरविंद पनगड़िया के भाई तथा अर्थशास्त्री बीएल पनगड़िया के पुत्र थे।
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पद्मश्री और डॉ. बीसी रॉय अवॉर्ड से सम्मानित
न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. पनगड़िया को 1992 में राजस्थान सरकार की ओर से मेरिट अवॉर्ड मिला। वे SMS में न्यूरोलॉजी के विभागाध्यक्ष रहे। 2006 से 2010 तक प्रिंसिपल रहे। 2002 में उन्हें मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने डॉ. बीसी रॉय अवॉर्ड दिया। 2014 में उन्हें पद्मश्री से नवाजा गया। उनके 90 से ज्यादा पेपर जर्नल में छप चुके हैं। उनकी मेडिकल और सोशल सहभागिता के चलते उन्हें यूनेस्को अवॉर्ड भी मिल चुका है। उन्हें कई लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड भी प्राप्त हुए हैं।
मुझे व मेरे परिवार को व्यक्तिगत क्षति हुई है, मेरे उनसे पारिवारिक रिश्ते रहे हैं लम्बे समय तक उन्हें भुलाना सम्भव नहीं होगा।
— Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) June 11, 2021
राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है। चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा, सरकारी मुख्य सचेतक डॉ. महेश जोशी, भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पुनिया, पूर्व चिकित्सा मंत्री राजेंद्र राठौड़ और विप्र फाउंडेशन के संस्थापक संयोजक सुशील ओझा ने भी शोक व्यक्त किया है। ओझा ने कहा की डॉ. पनगड़िया राजस्थान की सबसे बड़ी धरोहर थे, उनके जाने से चिकित्सा जगत में सबसे अपूरणीय क्षति हुई है। उसे भरा जाना संभव नहीं है।
