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एन्टी-चीटिंग बिल का सीएम सलाहकार लोढ़ा ने किया विरोध, बोले – सरकार दबाव व जल्दबाजी में लेकर आई विधेयक

लोढ़ा

जयपुर : राजस्थान विधानसभा में एंटी चीटिंग बिल पर बहस के दौरान सीएम अशोक गहलोत के सलाहकार संयम लोढ़ा ने भी बिल का विरोध करते हुए सदन में सरकार पर निशाना साधा। संयम लोढ़ा ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि यह बिल सरकार दबाव में लाई है, जल्दबाजी में लाई है। पिछले दिनों कैबिनेट बैठक में जो वाकया हुआ उस पूरी बैठक का ब्यौरा छप गया, कैबिनेट की बैठक की गोपनीयता किसने भंग की, अब तक यह पता नहीं लगा कि किस मंत्री ने कैबिनेट की गोपनीयता भंग ​की या मीटिंग में बैठे किसी अफसर ने। फिर हम लाचारी दिखा रहे हैं, अपनी कमजोरी दिखा रहे हैं। हमने मान लिया है कि पेपर लीक होंगे, हम 10 साल सजा देंगे, 10 करोड़ जुर्माना वसूलेंगे। आप शासन लेकर बैठे हैं। आप में नैतिक बल होना चाहिए ​कि आगे पेपर लीक नहीं होने देंगे।

अफसरों के निकम्मेपन की सजा दूसरों को देना उचित नहीं

संयम लोढ़ा ने आगे कहा कि अफसरों के निकम्मेपन की सजा आप दूसरों को देना चाहते हैं। किस बात की तनख्वाह देते हैं कि वे ढंग से एग्जाम नहीं करवा पाते हैं। इस पूरे मामले की जड़ में जाने की आवश्यकता है, क्यों एक साधारण बच्चा जिसे ढंग का स्कूल कॉलेज नहीं मिला वह प्रयास करता है कि पैसे से पेपर लेकर वह नौकरी प्राप्त कर ले। आपने कोचिंग सेंटरों का अंबार लगा रखा है। पैसे वालों की नालायक औलाद उन कोचिंग सेंटर्स में प्रवेश लेती हैं और स्कूलों में उनका नाम चलता रहता है, स्कूलों में जाने की जरूरत नहीं होती। कोचिंग वाले पेपर लेने के लिए 2 करोड़ खर्च करते हैं और 20 करोड़ छापते हैं। सरकार क्यों इन कोचिंग को बंद नहीं कर देती। नैतिक बल और प्रतिबद्धता की कमी है। उस बच्चे की तकलीफ से जुड़ने का अभाव है, जिसकी वजह से ये हालात बने।

निर्दोष को सजा नहीं मिलनी चाहिए, उस मूल भावना का अभाव

सीएम सलाहकार लोढ़ा ने कहा कि हमारे देश के कानून की मूल भावना है कि निर्दोष को सजा नहीं मिलनी चाहिए। सरकार जो काननू लाई है, उसमें उस मूल भावना का अभाव है। इस कानून से इंस्पेक्टर राज की तरफ आगे बढ़ रहे हो, इसके दुष्परिणाम आने वाले समय में भुगतने होंगे। पर्चा वहां से लीक हो रहा है जहां रखा गया है।

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