जयपुर। यूक्रेन और रूस के बीच छिड़े युद्ध के पहले दिन से ही यातना भरी जिंदगी जी रहे भारतीय छात्रों में खार्किव में फंसा थालड़का (नोहर) का रोहन शर्मा भी था। जो शनिवार शाम मौत के मुंह से निकलकर आखिर सकुशल जयपुर पहुंच गया। रोहन बुडापेस्ट (हंगरी) के रास्ते मुम्बई और मुम्बई से इंडिगो की फ्लाइट से शनिवार शाम जयपुर पहुंचा, जहां उसके चाचा नवीन शर्मा और उनकी धर्मपत्नी सुनीता शर्मा ने सांगानेर एयरपोर्ट पर रोहन की अगवानी की। उसकी आरती और बलईयां ली।
रोहन फोर्थ ईयर का मेडिकल स्टूडेंट है जो प्रदेश के प्रमुख चिकित्सक एवं पूर्व सीएमएचओ डॉ. महावीर प्रसाद शर्मा के छोटे भाई महेन्द्र का सुपुत्र है। रोहन ने मौत के मुंह से जिंदा देश लौटने की जो दास्तां बताई, वह कष्टप्रद और रोंगटे खड़े कर देने वाली है। रोहन ने बताया कि शुरुआती पांच दिन तो वे बिल्कुल भूखे ही बंकर में पड़े रहे, लेकिन साथी नवीन शेखरप्पा की मौत के समाचार ने हिला कर रख दिया। कर्नाटक का नवीन शेखरप्पा रोहन का साथी था तथा पास के ही बंकर में शरण लिए हुए था। मेडिकल के भारतीय छात्र की इस दर्दनाक मौत ने रोहन और अन्य साथियों के भी हौसले पस्त कर दिए। रोहन और उसके साथी बंकर से निकल मौत की परवाह किए बिना 7 किलोमीटर तक दौडकऱ खार्किव रेलवे स्टेशन पहुंचे। वहां भी बड़ी मुश्किल से उन्हें ट्रेन में जगह मिल पाई।
खार्किव से कीव होते हुए लवीव पहुंचे, वहां से Uzhhorod आए और वहां से चौप तक की टैक्सी की। चौप में इमिग्रेशन बनने के बाद वे ट्रेन से हंगरी के जहोनी पहुंचे। जहोनी से उन्हें बुडापेस्ट लाया गया। ट्रेन में खड़े-खड़े 20 घंटों का सफर जिंदगी का सबसे लंबा सफर था। भूखे-प्यासे रोहन और उसके साथियों की हिम्मत अंतिम चार घंटों में तो बिल्कुल जवाब दे चुकी थी और मन में मिसाइल के सामने आकर अपने आपको इस दुनिया से अलविदा कर देने जैसे बुरे विचार भी आ रहे थे, लेकिन कुछ साथियों ने हिम्मत बंधाकर जैसे-तैसे हंगरी बोर्डर तक पहुंचा दिया। हंगरी में पहुंच जान में जान आई। हंगरी में स्वयंसेवी संगठन तथा अन्य सरकारी एजेंसियों के द्वारा खाने-पीने और रहने की व्यवस्था की हुई थी। बुडापेस्ट में तीन दिन इंतजार के बाद भारतीय समय के अनुसार शनिवार को रात्रि एक बजे मुम्बई के लिए फ्लाइट मिली, जिसने सुबह मुम्बई एयरपोर्ट पर छोड़ा। वहां से इंडिगो की फ्लाइट पकडकऱ रोहन आज शाम सकुशल जयपुर पहुंचा।


