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बोर्ड-निगम-आयोग अध्यक्षों को मंत्री दर्जा देने पर रार:राठौड़ बोले-न्यायालय में चुनौती देँगे, खाचरियावास बोले- कसम हैं आपको कोर्ट जाओ

बोर्ड-निगम-आयोग अध्यक्षों को मंत्री दर्जा देने पर रार:राठौड़ बोले-न्यायालय में चुनौती देँगे, खाचरियावास बोले- कसम हैं आपको कोर्ट जाओ

जयपुर: मुख्यमंत्री गहलोत की ओर से प्रदेश के बोर्ड, निगमों और आयोगों में चेयरमैन को मंत्री का दर्जा देने के मामले पर सियासत गरमा गई है। प्रमुख विपक्षी पार्टी बीजेपी ने चेयरमैन को मंत्री का दर्जा देने को अवैधानिक बताते हुए कोर्ट में जाने की बात कही है। दूसरी तरफ सरकार ने भी बीजेपी के आरोपों पर पलटवार तेज कर दिया है। मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि बीजेपी नेताओं को बयानबाजी करने की बजाय कोर्ट जाना चाहिए। खाचरियावास ने कहा राजस्थान का बजट शानदार आया है। जिस कारण बीजेपी विधायकों का मानसिक संतुलन बिगड़ गया है। इसलिए वह बौखलाहट में बजट से लोगों का ध्यान डाइवर्ट करने के लिए इस तरह के मामले उछाल रहे हैं। उन्होंने कहा बीजेपी नेताओं को कसम है कि वह मंत्री दर्जा देने के मुद्दे को लेकर हाईकोर्ट जाएं। सरकार भी अपना जवाब हाईकोर्ट में पेश करेगी। लेकिन बीजेपी केवल बयानबाजी करती है, अपनी बात के इम्प्लीमेंटेशन का काम नहीं करती है। केवल मीडिया में छपने के लिए बीजेपी नेता ऐसे बयान देते हैं।

विपक्ष चाहे तो जा सकता है कोर्ट

सरकार के उप मुख्य सचेतक महेन्द्र चौधरी ने भी बीजेपी पर पलटवार करते हुए कहा है कि कांग्रेस आलाकमान, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने राजनीतिक नियुक्तियां सभी से सलाह मशविरा और बात करके की है। नियमों के तहत ही नियुक्तियां की गई हैं। विपक्ष को अगर कोर्ट जाना है, तो कोर्ट खुले हैं, विपक्ष के लोग जा सकते हैं। सरकार ने सभी नियुक्तियां देखकर और सोच विचार करके ही की हैं।

संविधान का हुआ उल्लंघन

बीजेपी की ओर से उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने ट्वीट कर रहा है कि कांग्रेस सरकार की ओर से राजनीतिक नियुक्ति पाने वाले 3 नेताओं को कैबिनेट मंत्री का दर्जा देना संविधान के अनुच्छेद 164 (1A) के प्रावधान का सरासर उल्लंघन है। जिसके तहत राज्यों में मंत्रियों की संख्या विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के 15 फीसदी तक ही हो सकती है। जबकि हाईकोर्ट्स और सुप्रीम कोर्ट भी अपने कई फैसलों में ऐसी नियुक्तियों को संविधान के अनुच्छेद 164 (1A) के प्रावधान का उल्लंघन बताते हुए अवैध ठहरा चुके हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बार-बार संविधान के प्रावधानों को नहीं मान रहे हैं। कांग्रेस सरकार आंतरिक विद्रोह को दबाने के लिए अवैधानिक पदों की रेवड़ियां राजनीतिक नियुक्तियों के जरिए बांटने का गलत काम कर रही है। सरकार राजस्थान के सरकारी खजाने पर सफेद हाथी बांधने का काम कर रही है। हम सरकार के इस असंवैधानिक फैसले की स्टडी कर हाईकोर्ट में चुनौती देंगे।

 

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