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REET में चीट की गूंज विधानसभा में भी सुनाई देगी

विधानसभा

जयपुर। राजस्थान विधानसभा के कल से शुरु हो रहे बजट सत्र में गहलोत सरकार को घेरने की रणनीति बनाने के लिए भाजपा विधायक दल की बैठक हुई। नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे समेत अधिकतर विधायक शामिल हुए। बैठक में तय किया गया कि REET पेपर लीक की जांच सीबीआई से करवाने तथा लेबल-1 की परीक्षा को रद्द करने की मांग को लेकर भाजपा आरपार की लड़ाई लड़ेगी। बूंदी में पार्टी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां पर हुए हमले, अलवर की मूक बधिर बालिका के साथ दुष्कर्म सहित कई अन्य मुद्दों पर भी भाजपा आक्रामक रुख अपनाते हुए सत्तारूढ़ दल को घेरेगी। भाजपा विधायकों के इन तेवरों को देखते हुए साफ हो गया कि मौजूदा सत्र इस बार हंगामेदार रहेगा।

बैठक में राजेंद्र राठौड़ ने पूनिया पर हुए हमले की घटना की निंदा करते हुए पुरजोर तरीके से इस मामले को उठाने की बात कही। नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि जिस तरह पिछले विधानसभा सत्र में सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरा गया था उससे भी तीखी धार इस बार सदन में दिखाई देगी। बैठक में तय किया गया कि प्रदेश में बिगड़ती कानून व्यवस्था, महिलाओं के साथ हो रहे अत्याचारों और बलात्कारों की घटना के साथ ही संविदा कर्मियों से जुड़े मुद्दों पर भी सरकार को घेरा जाएगा।

दर्जन भर नेताओं ने की वसुंधरा राजे की आगवानी

भाजपा विधायक दल की बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे भी शामिल हुई। खास बात यह रही वसुंधरा राजे की अगवानी के लिए विधानसभा के पोर्च में करीब एक दर्जन बीजेपी और राजे समर्थक विधायक पहुंचे। इन विधायकों ने राजे का वेलकम किया और पूर्व सीएम के साथ ना पक्ष लॉबी तक पहुंचे। वसुंधरा राजे की अगवानी करने वाले विधायकों में अशोक लाहोटी, प्रताप सिंह सिंघवी, कन्हैयालाल चौधरी, गोपीचंद मीणा, सुरेश रावत, अर्जुन लाल जीनगर, अभिनेष महर्षि, संजय शर्मा, धर्मनारायण जोशी, प्रताप सिंह सिंघवी समेत कई विधायक शामिल रहे।

प्रतिदिन मुद्दे होंगे तय

हर मंगलवार विधायक दल की होगी। भाजपा विधायक दल की बैठक में यह भी तय किया गया कि प्रतिदिन पार्टी से जुड़े प्रमुख विधायक सुबह बैठक कर यह तय करेंगे कि आज सदन में इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरना है। तमाम विधायक इसी पर अपना फोकस करेंगे। साथ ही शून्यकाल में विधायक अपने क्षेत्र और अपनी बात उठाने का पूरा मौका मिले इसको लेकर भी आम सहमति बनी।

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