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तीन घंटे जप, एक घंटे स्वाध्याय, आधे घंटे करेंगे ध्यान 

ध्यान 

जयपुर। सर्वे भवंतु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया: सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चित् दु:ख भाग्भवेत्… की मंगल कामना के साथ देश-विदेश के नैष्ठिक गायत्री परिजन शुक्रवार को बसंत पंचमी की पूर्व संध्या पर चालीस दिवसीय प्रखर साधना के लिए संकल्पित हुए। वैश्विक साधना के लिए देशभर से बड़ी संख्या में साधकों ने इसके लिए पंजीकरण करवाया है। दोष परिमार्जन और आशीर्वाद का क्रम शुक्रवार को संपन्न हुआ। राजधानी में किरण पथ मानसरोवर स्थित वेदना निवारण केन्द्र, ब्रह्मपुरी और वाटिका स्थित गायत्री शक्तिपीठ सहित प्रतापनगर सांगानेर, गांधीनगर, मालवीयनगर, वैशालीनगर सहित विभिन्न गायत्री चेतना  केन्द्रों में वेदमाता गायत्री और गुरू सत्ता के समक्ष गायत्री परिजन सवा लक्ष गायत्री जप के लिए संकल्पित हुए। बसंत पंचमी से विधिवत रूप से साधना अनुष्ठान का शुभारंभ होगा।

चालीस दिन में जपने होंगे सवा लाख गायत्री मंत्र

गायत्री परिवार राजस्थान के केंद्रीय प्रभारी जयसिंह यादव ने बताया कि गायत्री अनुष्ठान के अनंत लाभ है। इसके कुछ नियम है। गायत्री परिजन अपनी क्षमता, परिस्थिति के अनुसार कम या सभी का पालन करेंगे। चालीस दिवसीय प्रखर साधना में गायत्री महामंत्र के 125000 मंत्र जप या 12500 मंत्र लेखन अथवा 1250 गायत्री चालीसा का अनुष्ठान किया जाएगा। इस दौरान संयम, साधना, स्वाध्याय और सेवा के नियमों की पालना की जाएगी। साधना से जुड़ी शंका के समाधान के लिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाए हुए हैं।

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इसके अंतर्गत पूर्ण शाकाहारी अस्वाद भोजन, कम से कम अन्न का सेवन किया जाएगा। कुछ साधक केवल गौ दूध का सेवन कर यह अनुष्ठान पूर्ण करेंगे। तप के रूप में जमीन या तख्ते पर सोएंगे। अपना काम खुद करेंगे। शारीरिक, मानसिक और वाचिक ब्रह्मचर्य का पूरी तरह पाल करेंगे। अधिक से अधिक मौन का पालन अथवा एक से दो घंटे मौन रहेंगे। टीवी और सिनेमा से दूर, सकारात्मक चिंतन, चेहरे पर मुस्कान, मधुर संभाषण के साथ मनसा, वाचा कर्मणा किसी का भी दिल नहीं दुखाने का ध्यान रखा जाएगा।

साधना रहेगी अनुष्ठान का प्राण

सुबह उठते ही बिस्तर पर 5 से 10 मिनिट सविता देवता का ध्यान और पूरे दिनचर्या की रूपरेखा तय करने के बाद दैनिक कर्म से निवृत्त होकर प्रतिदिन तीन घंटे गायत्री मंत्र का जप या गायत्री मंत्र लेखन अथवा गायत्री चालीसा का पाठ किया जाएगा। प्रतिदिन आधे घंटे गुरुदेव के साथ ध्यान करेंगे। पहली रोटी के पांच टुकड़े अग्नि देवता को अर्पित करते हुए प्रतिदिन घर पर बलिवैश्वदेव महायज्ञ किया जाएगा। इसके अलावा गायत्री यज्ञ में 24 मंत्राहुति अर्पित की जाएगी। यज्ञ मानसिक रूप से भी संपन्न किया जकेगा। भगवती देवी शर्मा माताजी की आवाज में 15 मिनट अखंड दीपक के ध्यान के अलावा ज्योति जागरण ध्यान भी किया जाएगा। माताजी के साथ में 15 मिनट तक नाद योग साधना की जाएगी। सोने के पहले गुरुदेव और माताजी का ध्यान, अपनी गलतियों के लिए क्षमा और प्रणाम करते हुए अपने आप को गुरुचेतना में लीन करते हुए तत्वबोध की साधना की जाएगी।

स्वाध्याय से देंगे मन-मस्ष्कि को खुराक: प्रतिदिन कम से कम एक घंटे गायत्री महाविज्ञान या गुरुगीता या किसी एक गायत्री वांगमय का स्वाध्याय किया जाएगा। प्रतिदिन गायत्री प्रार्थना के साथ सभी की मंगल कामना के लिए अपनी साधना की आहुति  देनी होगी।

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