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अलाभकारी संस्थाओं को अब विकास शुल्क एवं बीएसयूपी शेल्टर फंड राशि से भी छूट

गठन

जयपुर। सामाजिक सुरक्षा निवेश प्रोत्साहन योजना-2021 के तहत प्रदेश में पात्र अलाभकारी संस्थाओं को उनके कार्यों एवं विशिष्ट प्रकृति के मद्देनजर विकास शुल्क एवं बीएसयूपी (बेसिक सर्विसेज फॉर अरबन पूअर) शेल्टर फंड राशि से भी मुक्त रखने की मंजूरी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दी है। गहलोत के निर्देश पर नगरीय विकास विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना भी जारी कर दी है।

उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने नगरीय क्षेत्रों में जनोपयोगी सुविधाओं के विकास को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में कार्यरत मान्यता प्राप्त अलाभकारी संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित करने एवं उन्हें कार्य के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सामाजिक सुरक्षा निवेश प्रोत्साहन योजना-2021‘‘ लागू की है। इस योजना के तहत बच्चों, महिलाओं, दिव्यांगों, भिक्षावृत्ति तथा नशा करने वाले व्यक्तियों, निर्धन, बेघर, ट्रांसजेंडर एवं वृद्धजनों के कल्याण के क्षेत्र में मान्यता प्राप्त अलाभकारी संस्थाओं को विभिन्न सुविधाएं, रियायत एवं छूट प्रदान की जा रही हैं।

इसके तहत इन संस्थाओं को कृषि से अकृषि प्रयोजनार्थ नियमन के लिए निर्धारित प्रीमियम दरों, भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क एवं भवन निर्माण अनुज्ञा शुल्क में शत-प्रतिशत छूट देय है। साथ ही उनके द्वारा क्रय की गई अथवा लीज पर ली गई अचल संपत्ति के दस्तावेजों पर पंजीयन शुल्क एवं स्टाम्प ड्यूटी में भी शत-प्रतिशत छूट प्रदान की जा रही है। अब इन छूट के साथ-साथ विकास शुल्क एवं बीएसयूपी (बेसिक सर्विसेज फॉर अरबन पूअर) शेल्टर फंड राशि से भी मुक्त रखने की मंजूरी प्रदान कर दी गई है।

मुख्यमंत्री ने सामाजिक सुरक्षा क्षेत्र में निवेश करने वाली संस्थाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रशासन शहरों के संग अभियान शिविरों में इस योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि इन संस्थाओं के माध्यम से नगरीय क्षेत्रों में जनोपयोगी सुविधाएं जैसे कि-चिकित्सा एवं शैक्षणिक सुविधाएं, वृद्धाश्रम, अनाथालय, नारी निकेतन, कुष्ठ आश्रम, धर्मशाला, दिव्यांगजन केन्द्र, नशामुक्ति केन्द्र, कन्या आश्रम, बाल गृह आदि के विकास को गति दी जा सके।

मुख्यमंत्री ने पहले कार्यकाल में भी की थी निःशुल्क भूमि आवंटन की पहल

गौरतलब है कि गहलोत ने मुख्यमंत्री के रूप में अपने पहले कार्यकाल के दौरान भी नशामुक्ति केन्द्रों, वृद्धाश्रमों, सार्वजनिक प्याऊ, शौचालयों आदि के निर्माण एवं रखरखाव, मूकबधिर तथा दिव्यांग व्यक्तियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशिक्षण केन्द्र, पेंशनर्स के लिए विश्रामगृह, रैनबसेेरे, प्रेस क्लब, पुस्तकालय एवं वाचनालय के निर्माण के लिए गैर-सरकारी संस्थाओं को एक हजार वर्ग गज तक निशुल्क भूमि आवंटन की महत्वपूर्ण पहल की थी। इसके लिए राजस्व विभाग ने 31 जुलाई, 2002 को भू-राजस्व अधिनियम-1956 में संशोधन की अधिसूचना जारी की थी।

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