चंडीगढ़: दिल्ली बॉर्डर पर चल रहा किसान आंदोलन कल यानी बुधवार को खत्म हो सकता है। सिंघु बॉर्डर पर मंगलवार को हुई संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में इस पर फैसला नहीं हो पाया। यह बैठक दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर हुई। कल फिर मीटिंग बुलाई गई है। संयुक्त किसान मोर्चा ने बताया कि केस वापसी और मुआवजे को लेकर केंद्र सरकार के प्रस्ताव पर किसान सहमत हैं। ऐसे में कल बैठक के बाद किसान आंदोलन खत्म करने पर फैसला लिया जा सकता है।
जिस पर सिंघु बॉर्डर पर किसान नेताओं की मीटिंग हुई, बैठक में इन मुद्दों पर हुई चर्चा
- MSP के मुद्दे पर केंद्र सरकार राज्यों, कृषि विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों के साथ SKM के प्रतिनिधित्व के साथ एक कमेटी गठित करेगा।
- केंद्र सरकार ने यूपी और हरियाणा समेत सभी जगहों पर किसानों के खिलाफ दर्ज केस वापस लेने की सहमति दी है।
- केंद्र शासित प्रदेशों में किसानों के खिलाफ सभी वापस लिए जाएंगे।
- केंद्र सरकार गैर भाजपा शासित राज्यों से भी इसका पालन करने का अनुरोध कर रही है।
- पंजाब पहले ही मुआवजे की घोषणा कर चुका है।
- अब यूपी और हरियाणा सरकार भी मुआवजे के लिए संयुक्त किसान मोर्चा से बातचीत के लिए तैयार है।
- बिजली एक्ट पर केंद्र सरकार ने राज्यों से बात करने और समाधान निकालने का आश्वासन दिया है।
- पराली को लेकर लाया गया कानून किसानों पर लागू नहीं होगा।
3 कृषि कानून वापसी के बाद निकला रास्ता
केंद्र सरकार तीनों कृषि कानून वापस ले चुकी हैं, जिसकी वजह से यह आंदोलन शुरू हुआ था। जिस पर लोकसभा, राज्यसभा के बाद राष्ट्रपति की मुहर लग चुकी है। इसके बाद से ही दिल्ली बॉर्डर से किसान वापस लौटना शुरू कर चुके थे। किसान संगठनों पर भी दबाव बन गया था कि वह आंदोलन खत्म करें।
पंजाब के किसान संगठन दिल्ली बॉर्डर पर आंदोलन खत्म कर वापसी के पक्ष में हैं। अगर केंद्र सरकार केस रद्द कर देती है और MSP कमेटी बना देती है तो वह आंदोलन को खत्म करना चाहते हैं। इसी में इस दौरान मरे करीब 700 किसानों के परिवारों को मुआवजे की मांग भी शामिल है।
