जयपुर : नगर निगम ग्रेटर जयपुर में BVG कंपनी के बकाया 276 करोड़ रुपए के भुगतान के बदले 20 करोड़ रुपए की रिश्वत मांगने के मामले में जेल गए राजाराम गुर्जर को राजस्थान हाईकोर्ट ने जमानत दे दी है। नगर निगम ग्रेटर की निलंबित मेयर सौम्या गुर्जर के पति राजाराम को ACB ने जून में गिरफ्तार किया था। इसके बाद कोर्ट ने उसे 29 जून को जेल भेज दिया था। 94 दिन जेल में रहने के बाद राजाराम शुक्रवार को जेल से छूटेंगे।
राजाराम के अधिवक्ता विजय यादव व जितेन्द्र सिंह राठौड़ ने पैरवी करते हुए कहा कि वह 29 जून से न्यायिक हिरासत में हैं। उनके खिलाफ अनुसंधान पूरा होकर चालान पेश हो चुका है। मामले के सह आरोपी कंपनी प्रतिनिधि ओमकार सप्रे की हाईकोर्ट से जमानत हो चुकी है। मामले के अधिकतर गवाह सरकारी अफसर व कर्मचारी हैं। उन्हें डराने या धमकाने का कोई सवाल ही नहीं है। प्रार्थी ने ना तो किसी काम के बदले किसी व्यक्ति से रिश्वत मांगी है, ना ही वह किसी को अनुचित लाभ देने की स्थिति में है। यह मामला पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है और ACB ने अभी तक कथित वीडियो की वास्तविक क्लिप भी बरामद नहीं की है। मामले की ट्रायल में समय लगेगा। इसलिए आरोपी प्रार्थी को जमानत दी जाए।
दोनों पक्षों में हुई बहस
सरकारी वकील मंगल सिंह सैनी ने कहा कि यह हाई प्रोफाइल मामला है। अन्य आरोपियों के खिलाफ जांच लंबित है। ऐसे में आरोपी को जमानत का लाभ नहीं दिया जाए। जस्टिस पीएस भाटी ने दोनों पक्षों की बहस को सुनने के बाद राजाराम को जमानत देने का आदेश सुनाया। दरअसल, 20 करोड़ रुपए की रिश्वत मांगने संबंध में वीडियो वायरल होने के बाद ACB ने राजाराम, कंपनी प्रतिनिधि ओमकार सप्रे, संदीप चौधरी और आरएसएस से जुड़े निंबाराम के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी।
