जयपुर : राज्य में पिछले दिनों कोयले की कमी से हुए बिजली संकट और महंगी बिजली खरीद के मुद्दे पर बीजेपी विधायकों ने सरकार को घेरा। विधानसभा में स्थगन प्रस्ताव के जरिए चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि बिजली कंपनियों में भारी गड़बड़ी के कारण, जनता बिजली कटौती से त्रस्त है। राजस्थान में सबसे महंगी बिजली है। महंगे दामों पर बिजली खरीदी जा रही है। कुप्रबंधन के कारण बिजली तंत्र की हालत खराब है। बिजली खरीद सवालों के घेरे में है।
विधानसभा में ऊर्जा मंत्री डॉ. बीडी कल्ला बिजली के मुद्दे पर मंगलवार को जवाब देंगे। गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि पिछले दिनों कुप्रबंधन के कारण 8 से 10 घंटे की कटौती झेलनी पड़ी। एक तरफ सरकार बिजली में आत्मनिर्भर होने का दावा करती है, दूसरी तरफ कटौती की जा रही है। कोयला संकट क्यों आया। कुप्रबंधन का इससे बड़ा उदाहरण हो नहीं सकता। कोर्ट से मुकदमा हार जाने के कारण 4700 करोड़ रुपए निजी बिजली उत्पादन कंपनी को देना पड़ा है। यह भार भी राजस्थान की जनता पर डाला गया।
राठौड़ बोले- कंपनियों का बकाया क्यों रखा है?
उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि सबसे महंगी बिजली होने के बावजूद आठ महीने से कोयला कंपनियों के 1751 करोड़ बकाया क्यों रखा है? राज्य सरकार ने 2019 में 12470 करोड़, 2020 में 13 हजार करोड़ की महंगी बिजली खरीदी। भ्रष्टाचार का तांडव करने के लिए बिजली महंगी खरीदी। इसके बाद जनता पर जजिया कर लगाया गया। राजस्थान में बिजली खरीद का एक नेक्सस बन गया है, जो चांदी कूट रहा है। निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए सारा जतन किया जा रहा है। हमारे पावर प्लांट में उत्पादन बंद करके बाहर से महंगी बिजली खरीदने का तर्क समझ से परे है।
बिजली संकट को लेकर बीजेपी विधायकों ने जमकर उठाए सवाल
प्रदेश में बिजली संकट को लेकर बीजेपी विधायक चंद्रकांता मेघवाल, मदन दिलावर, अविनाश गहलोत, सूर्यकांता व्यास, जोगेश्वर गर्ग ने कहा कि बिजली की दरें बहुत ज्यादा हैं। ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों में बिजली कटौती आम बात है। राजनीतिक आधार पर किसानों की वीसीआर भरी जा रही है। बीजेपी के कार्यकर्ताओं को निशाना बनाकर वीसीआर भरी जा रही है।
