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लोकतंत्र की मजबूती के लिए पक्ष-विपक्ष में अंडरस्टेंडिंग होना बेहद जरुरी – गुलाम नबी

गुलाम नबी

जयपुर : कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि संबंधो की प्रगाढ़ता और और पक्ष-विपक्ष के नेताओं के बीच जब तक अंडरस्टेंडिंग नहीं होगी तब तक सही ढंग से लोकतंत्र नहीं चलेगा। गुलाब नबी ने पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी ओर पूर्व उपराष्ट्रपति स्व. भैरोसिंह शेखावत से अपने प्रगाढ संबंधों का उदाहरण देते हुए बताया कि इससे उन्हें सदन चलाने में भी काफी मदद मिली। गुलाम नबी आज राजस्थान विधानसभा में संसदीय लोकतंत्र और जनता की अपेक्षाएं विषय पर आयोजित एक सेमिनार को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने सेमिनार में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोसिंह शेखावत से जुड़े खुलासे किए। आजाद ने कहा कि राजनीति में कटुता के लिए जगह नहीं होनी चाहिए, मेरे सबसे बेहतर संबंध रहे हैं। एक बार मैं पूर्व सीएम भैरोसिंह शेखावत के खिलाफ प्रचार करने उनके निर्वाचन क्षेत्र में जा रहा था। एयरपोर्ट पर ही शेखावत साहब मिल गए, उन्होंने मुझसे कहा कि उनका एक वर्कर निर्वाचन क्षेत्र में मिलेगा, वह आपके लिए गोश्त लेकर आएगा। तुम कश्मीरी हो, गोश्त खाने वाले हो। मैं शेखावत साहब के खिलाफ प्रचार करने आया था और उन्होंने मेरे लिए गोश्त ​भिजवाया। यह संबंधों की प्रगाढ़ता होती है। चुनाव में मैंने कभी विपक्ष के उम्मीदवार का नाम नहीं पूछा क्योंकि मुझे उसके खिलाफ नहीं बोलना था, मैं उसके खिलाफ क्यों बोलूं, हमें अपने कामों पर बोलना है।’

वाजपेयी ने मदनलाल खुराना को संसद चलाने के टिप्स लेने भेजा
गुलाम नबी आजाद ने कहा कि पक्ष और विपक्ष में बेहतर सामांजस्य से जनता को फायदा होता है। मैंने हमेशा इसका ध्यान रखा। मैंने वो टिप्स केवल अटल बिहारी वाजपेयी को बताए थे। नरसिम्हा राव के समय हम दो लोगों ने सदन चलाया। हर तीन दिन में वाजपेयीजी का खाना मेरे यहां होता था, तो मेरा खाना वाजपेयीजी के यहां। वाजपेयी विपक्ष के नेता थे और मैं संसदीय कार्य मंत्री था। जब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने तो पहला फोन उन्होंने मुझे किया, मैं तो विपक्ष में था और उससे पहले ससंदीय कार्य मंत्री रह चुका था। वाजपेयीजी ने मुझसे कहा कि मदनलाल खुराना को भेज रहा हूं, इन्हें संसदीय कार्य मंत्री बना रहा हूं, उसे जरा समझाना कि सदन कैसे चलाना है, उस समय तक ​मंत्रियों को विभाग तक नहीं बंटे थे। खुरानाजी आए, मुझे जो बताना था वह बताया। यह उनके विश्वास की बात थी। आजाद ने कहा कि पक्ष विपक्ष के नेताओं के बीच अच्छे संबंधों का फायदा सदन चलाने से लेकर बिल पास होने तक हर जगह होता है। अभी भी कुछ ऐसे संबंध थे तो लोगों ने कहा कि बीजेपी में जा रहा है, जब नेताओं के बीच अंडरस्टेंडिंग नहीं होगी तो लोकतंत्र नहीं चलेगा।

सिफारिश करवाने वाले सत्ता और विपक्ष नहीं देखते
आजाद ने कहा कि हमारे यहां लोग सत्ता और विपक्ष नहीं देखते, सिफारिश करवाने आते ही रहते हैं। आप अगर किसी विभाग के मंत्री रह गए तो उससे आपका पीछा मरने के बाद ही छूटेगा। जब तक आप जीएंगे लोग उस विभाग से जुड़ी सिफारिश करवाने आएंगे। अगर कोई नेता किसी विभाग का मंत्री रह गया तो लोग उसके विपक्ष में होने के बाद भी सिफारिश करवाने आते हैं। अफसर चाहे हमें भूल गया हो, लेकिन लोग नहीं भूलने देते। कोविड के वक्त मेरे पास देश भर से अस्पतालों के लिए फोन आए, क्योंकि मैं स्वास्थ्य मंत्री रह चुका था।

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देश की एकता के लिए संसदीय लोकतंत्र जरूरी
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी ने कहा है कि संसदीय लोकतंत्र में जनता की नेताओं से उम्मीदें बढ़ी हैं। पंचायत और नगरपालिकाओं के नियमित चुनाव के बाद जनता की अपेक्षाएं अलग-अलग हैं। हमने जनता को शिक्षित नहीं किया। आज गांव का आदमी यह अपेक्षा करता है कि नाली का काम भी विधायक करेगा। आप नीति कितनी ही अच्छी बना लें, लेकिन राज्य काम नहीं करेगा तो उसका कोई फायदा नहीं। राज्य कितनी ही नीति बना लें, लेकिन पंचायत काम नहीं करेगी तो कारगर नहीं होगी।

डॉ. सीपी जोशी ने कहा कि 1980 में पहले सरपंच साहब कहलाता था, आज सरपंच कहलाता है। धन के प्रभाव के कारण पंचायत के चुनाव प्रभावित होते हैं, लोकतंत्र कमजोर होगा। पंचायत स्तर पर अपेक्षा हो कि नाली, सड़क के काम पंचायत करें। विधायक का काम नाली और सड़क बनाना नहीं है। जनता की बढ़ती अपेक्षाओं के बीच नीचे के स्तर पर काम होने जरूरी हैं। देश की एकता के लिए संसदीय लोकतंत्र जरूरी है। इनमें प्रश्न खड़े हुए हैं उन्हें पूरा करना होगा। हमें यह सोचना होगा कि क्या कारण थे कि जेपी आंदोलन हुआ, अन्ना आंदोलन हुआ और अब किसान आंदोलन खड़ा हो गया है। हमें इसकी तह तक जाना होगा। यदि इन बातों को नहीं समझा गया तो हम जन अपेक्षाओं को कैसे पूरा करें।

कोविडकाल में सबसे बड़ी चुनौती शिक्षा के क्षेत्र में रही
डॉ. सीपी जोशी ने कहा कि आज सबसे बड़ी चुनौती शिक्षा के क्षेत्र में है। महामारी के दौर में स्कूल बंद हैं। मोबाइल से बच्चे ऑनलाइन पढ़ नहीं पा रहे हैं। महामारी के बाद जनता की अपेक्षा बढ़ गई हैं। वित्तीय संसाधन उपलब्ध होने पर ही काम होंगे। जीएसटी लागू होने के बाद दिक्कतें बढ़ी हैं, सेस का पैसा राज्य को नहीं मिलता। पैसा नहीं मिलेगा तो राज्य सरकारें जनता के काम उनकी मांग के हिसाब से कैसे पूरा करेंगी, उसमें दिक्कत आएंगी।

पक्ष-विपक्ष से ऊपर उठकर करें काम- कटारिया
नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि कॉमनवेल्थ पार्लियामेंटरी एसोसिएशन (सीपीए) को 40 साल में पहली बार विधायकों ने सुना है। संसदीय प्रणाली से बेहतर कुछ नहीं है। हम सबका एक ही लक्ष्य है, देश की भलाई और जनता की भलाई। सत्तारूढ़ दल अपने कामों से जनता का हित करता है, जबकि विपक्ष जनता से जुड़े मुद्दे लाकर सदन में उठाता है, लेकिन विधानसभा में आकर हम पक्ष और विपक्ष हो जाते हैं। इतने चुनाव हो जाने के बावजूद आज तक सरकार में बदलाव के लिए हिंसा नहीं हुई, हमारा देश सौभाग्यशाली है।

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