जयपुर। चिकित्सक भी मंत्रीय शक्ति का उपयोग इलाज और सर्जरी में सहयोग के रूप में लेने लगे हैं। दिल्ली एम्स में गंभीर बीमारों के लिए महामृत्युंजय जाप की खबरे भी आपने पढ़ी होगी। अब जयपुर के एक निजी अस्पताल के चिकित्सकों ने ब्रेन ट्यूमर सर्जरी के दौरान मरीज से गायत्री मंत्र व राम राम का जाप करवाने का वाकया सामने आया है।
गायत्री मंत्र के साथ ब्रेन ट्यूमर सर्जरी करने वाले चिकित्सको को ऑपरेशन के दौरान मरीज की आवाज जाने और पैरालिसिस का डर था, इसलिए डॉक्टरों ने बिना बेहोश किए मरीज से बातचीत करते हुए गायत्री मंत्र व राम-राम का जाप करवाते सर्जरी की।
4 घंटे तक चले इस ऑपरेशन में मरीज गायत्री मंत्र का जाप करता रहा। न्यूज पेपर भी पढ़ाया गया। डॉक्टरों की टीम ने सिर में दो इंच का चीरा लगाकर CUSA (कैविट्रॉन अल्ट्रासोनिक सर्जिकल एस्पिरेटर) और माइक्रोस्कॉप की मदद से ट्यूमर को बाहर निकाला।
जयपुर के एक निजी हॉस्पिटल के सीनियर न्यूरोसर्जन डॉ. के.के. बंसल ने बताया कि चूरू के रहने वाले 57 साल के रिढमल राम को बार-बार मिर्गी के दौर आते थे। जिसके कारण अस्थाई रूप से उनकी आवाज भी कुछ देर के लिए चली जाती थी। जांच में ब्रेन के स्पीच एरिया में ब्रेन ट्यूमर का पता चला। ब्रेन ट्यूमर ऐसी जटिल जगह पर था कि सर्जरी से मरीज की आवाज जा सकती थी। लकवा होने का भी खतरा था। ऐसे में अवेक ब्रेन सर्जरी करने का निर्णय लिया गया। ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर कभी बातचीत करते तो कभी राम-राम के नाम का जाप भी करवाते। मरीज से फ्रूट के नाम भी पूछे गए।
डॉ. बंसल ने बताया कि सामान्य ब्रेन ट्यूमर सर्जरी में मरीज को बेहोश कर दिया जाता है, लेकिन अवेक ब्रेन सर्जरी में मरीज पर निगरानी रखने के लिए उससे लगातार बातचीत की जाती है। ऐसी एक्टिविटी करवाई जाती है जिससे सर्जन ब्रेन के किसी दूसरे हिस्से को बिना नुकसान पहुंचाए ट्यूमर को सही जगह से निकाल सकें। डॉक्टर मरीज रिढमल से गायत्री मंत्र का जप करने के साथ ही उससे लगातार बातचीत जारी करते रहे। मरीज से समय-समय पर उंगलियों के मूवमेंट करने के लिए भी कहा गया।
सर्जरी में मौजूद अन्य न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. पृथ्वी गिरी और डॉ. मधुपर्णा पॉल ने बताया कि इस केस में ट्यूमर दिमाग के उस हिस्से में था जहां से इंसान की वॉइस व शरीर के दूसरे मूवमेंट कंट्रोल होते हैं। यह सर्जरी चुनौतीपूर्ण थी। छोटी सी गलती से मरीज की आवाज तक जा सकती थी। ऐसे में उसके बोलेने और सुनने के साथ दूसरे मूवमेंट पर नजर रखने के लिए गायत्री मंत्र का जाप कराया गया। साथ ही पैरों व हाथों की उंगलियों के मूवमेंट भी कराए गए। इससे हमें यह भी पता चलता है कि कहीं मरीज को स्पीच अरेस्ट तो नहीं हो रहा। क्योंकि जब भी हम गलत हिस्से को छेड़ दे तो मरीज को स्पीच अरेस्ट यानि वह अपनी आवाज खो देता है। वह किसी बात पर रिएक्ट नहीं कर पाता।
