उदयपुर। पेसिफिक मेडिकल कॉलेज, उदयपुर के औषधि विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष एवं वर्तमान में प्रोफेसर एमेरिटस डॉ.एस.के.वर्मा एवं बायोकेमिस्ट्री विभागाध्यक्ष प्रो.नीता साही के संयुक्त तत्वाधान में कोरोना टीकाकरण अभियान के प्रथम चरण में जिन स्वास्थ्यकर्मियों को सर्वप्रथम टीका लगाया गया था। उनमें टीकाकरण के बाद बनने वाली एंटीबाडीज पर अध्ययन किया गया।
शोध परिणामों की विवेचना करते हुए डॉ.एस.के.वर्मा ने बताया की कोविशील्ड टीकाकरण की पहली खुराक के एक महीने बाद ही 80 प्रतिशत लोगों में एंटीबाडी विकसित हुई। जिनका औसत स्तर 10 था और टीके की दूसरी खुराक के एक महीने बाद एंटीबाडी का स्तर 85 प्रतिशत में पाया गया, जिसका औसत 10 से बढ़कर 13 हो गया। टीकाकरण के छह माह बाद पाया गया की एंटीबाडी का स्तर 57 प्रतिशत लोगो में निम्न स्तर पर पहुंचकर औसत 2 हो गया तथा 43 प्रतिशत में तो एंटीबाडी स्तर शून्य था।
डॉ.एस.के.वर्मा ने स्पष्ट किया कि इस अध्ययन में एक रोचक तथ्य सामने आया कि जो लोग टीकाकरण के बाद कोरोना पीड़ितों के संपर्क में आये। उनका एंटीबाडी स्तर उच्चतम था परन्तु उनमें कोरोना के लक्षण नहीं दिखाई दिए। इस शोध से यह स्पष्ट हुआ कि कोविशील्ड टीकाकरण की कोरोना से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता छह माह बाद घट जाती है और उन्हें बूस्टर डोज की आवश्यकता होती है।
प्रो.नीता साही ने बताया की टीकाकरण गंभीर कोरोना बीमारी से बचाता है परन्तु कोरोना संक्रमण से नहीं। इसलिए हमें कोरोना प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने की आवश्यकता है। पेसिफिक मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ.ए.पी.गुप्ता ने बताया की इस शोध परिणाम से यह निष्कर्ष निकलता है कि कोविशील्ड टीकाकरण की प्रतिरोधक क्षमता छह माह बाद कम हो जाती है। ऐसी स्थिति में टीके की बूस्टर डोज आवश्यक है। पश्चिम के कुछ देशों में 60 वर्ष से अधिक उम्र वालों को सितम्बर से बूस्टर डोज लगाने का प्रावधान है।
गुप्ता ने कहना है कि वर्तमान शोध कोविशील्ड की एक माह के अंतराल पर लगी दो खुराकों के मरीजों में हुआ है, परन्तु भविष्य में कोविशील्ड की तीन माह के अंतराल पर लगी दो खुराकों के व्यक्तियों तथा कोवेक्सीन टीकाकरण वाले व्यक्ति समूह पर भी शोध जारी रहेगा।
पीएमसीएच चेयरमैन राहुल अग्रवाल ने बताया की यह शोध राजस्थान में अपने स्तर पर प्रथम अध्ययन है। जो दर्शाता है कि टीकाकरण के बाद बूस्टर डोज की आवश्यकता है। कोरोना की तीसरी लहर की संभावनाओं को देखते हुए गंभीर बीमारियों से ग्रसित लोगो और स्वास्थ्य कर्मियों कोे बूस्टर की खुराक मिल जाए तो उनकी कोरोना से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाएगी।

