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कार्यकारी कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष बनाने में भी पेच फंसा, वरिष्ठ नेता डोटासरा के अधीन काम करने को तैयार नहीं

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जयपुर। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव व राजस्थान के प्रभारी अजय माकन बोल तो गए कि कई मंत्री संगठन में काम करने के इच्छुक हैं, लेकिन वास्तविकता इसके उलट हैं। संगठन के स्थान पर सब मलाईदार पद चाहते हैं। आदिवासी क्षेत्र में अपनी मजबूत पकड़ रखने वाले विधायक महेन्द्रजीत मालवीय और दुर्रु मियां को माकन ने कल मिलने के लिए बुलाया था। माकन उन्हें कार्यकारी अध्यक्ष बनाना चाहते हैं, जबकि मालवीय मंत्री बनने पर अड़े हुए हैं।
मालवीय आदिवासी क्षेत्र में प्रभावशाली नेता हैं तथा वो ही एकमात्र नेता है जो आदिवासी क्षेत्र में बढ़ते बीटीपी के प्रभाव से कांग्रेस को बचा सकते हैं। आलाकमान के सामने ये ही बड़ा धर्मसंकट हैं। कार्यकारी अध्यक्ष बनाने में एक परेशानी कांग्रेस आलाकमान के सामने यह आ रही हैं कि मंत्रिमण्डल से संगठन में भेजे जाने वाले संभावित चेहरों में से भी अधिकांश राजनैतिक दृष्टि से वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष गोविंदसिंह डोटासरा से काफी वरिष्ठ हैं।

ये है बाधा

चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा को ही ले, वे कैबिनेट मंत्री हैं तथा उन्हें संगठनात्मक दृष्टि से भी काम का लम्बा अनुभव हैं। वे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष से नीचे का ऑफर कतई स्वीकार करने को तैयार नहीं। इसी तरह रजस्व मंत्री हरीश चौधरी कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव के रूप में दिल्ली में काफी प्रभावी रह चुके हैं। वे भी केबिनेट मंत्री हैं उनका सपना संगठन में प्रदेशाध्यक्ष का तो है, लेकिन कार्यकारी अध्यक्ष बनने को वे भी तैयार नहीं। इसी तरह कृषि मंत्री लालचंद कटारिया वर्तमान में कैबिनेट मंत्री है। वे केन्द्र में भी मंत्री रह चुके। उनका ख्वाव भी संगठन में पीसीसी अध्यक्ष बनने का ही हैं। दुुर्रू मियां भी कांग्रेस में वरिष्ठ नेता माने जाते हैं। चूंकि वर्तमान में वे विधायक व मंत्री कुछ भी नहीं हैं। वे भी बोर्ड-निगम में नियुक्ति चाहते हैं।

आलाकमान की सर्वमान्य हल निकालने की कवायद

कांग्रेस आलाकमान के सामने यह भी संकट की स्थिति है कि सोशल इंजीनियङ्क्षरंग के हिसाब से जब तक प्रभावशाली नेता कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में नहीं बैठे तब तक चार-चार कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष नियुक्त करने का भी कोई फायदा नहीं। इस पेचीदा स्थिति में से हल तभी निकल सकता है जब डोटासरा के स्थान पर किसी ऐसे नेता को संगठन की बागडोर सौंपी जाए जो न केवल संगठन को सही ढंग से चला सके, बल्कि उसके साथ चारों कार्यकारी अध्यक्षों को भी साध सके। सर्वमान्य हल निकालने के लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बदलने के विकल्प पर भी विचार किया जा सकता है। अगर ऐसा हुआ तो डोटासरा के स्थान पर जाट चेहरा ही आ सकता हैं उसमें पूर्व नेता प्रतिपक्ष रहे रामेश्वर डूडी, हरीश चौधरी व लालचंद कटारिया के ही नाम प्रमुखता से लिए जा रहे हैं।

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