जयपुर : राज्य सरकार के नर्सरी से माध्यमिक शिक्षा तक के बच्चों के लिए दो अगस्त से स्कूल खोलने के फैसले से न केवल अभिभावक चिंतित है, बल्कि पढ़ाने वाले टीचर भी आश्चर्यचकित है कि एक साथ सभी कक्षा के बच्चों को बुलाना एकाएक क्या उचित रहेगा। हालांकि इस बारे में सरकार की तरफ से कोई लिखित गाइडलाइन सामने नहीं आई है। केवल शिक्षा राज्यमंत्री डोटासरा के बयान ही आए है जो सभी को शंका में डालने वाले हैं। विपक्ष ने तो सरकार के इस फैसले का पुरजोर विरोध किया है।
पूर्व शिक्षा राज्यमंत्री वासुदेव देवनानी ने कहा कि सरकार को बच्चों के लिए स्कूल खोलने से पहले अभिभावकों व शिक्षक नेताओं के साथ वार्ता करनी चाहिए थी। उसके बाद प्रथम चरण में नवीं से बारहवीं तक के बच्चों को बुलाया जाता और 15 दिन तक देखा जाता कि किसी तरह का कोरोना का प्रभाव बच्चों तक नहीं पहुंचा है। उसके बाद छठीं से आठवीं तक के बच्चों को बुलाया जाता और सबसे अंत में तीसरे चरण में प्राइमरी के बच्चों को स्कूल बुलाते। देवनानी ने सरकार से अपने इस फैसले पर पुर्नविचार करने की मांग की है और कहा कि कोरोना की तीसरी लहर के आने का जो खतरा मंडराया हुआ है उसे देखते हुए सावधानी ओर सर्तकता बरतने की जरूरत है। उन्होंने सरकार के इस फैसले को तुगलकी करार दिया।
दूसरी तरफ शिक्षा राज्यमंत्री गोविंद सिंह डोटासरा अभिभावकों व अन्य विरोध को देखते हुए आज बोले कि वे अभिभावकों व शिक्षकों से बात करेंगे। अगर कोई अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजना चाहे तो ऑनलाइन पढ़ाई पर भी विचार किया जाएगा। इस बीच सभी को गृह एवं शिक्षा विभाग की ओर से जारी होने वाले आदेशों को इंतजार है।
