जयपुर। प्रदेश कांग्रेस को अपने वरिष्ठतम नेताओं के सम्मान तक का भी भान नहीं। प्रदेश कांग्रेस ने राज्य में उप चुनाव वाले दो क्षेत्रों वल्लभनगर व धरियावद के लिए जो समन्वय समिति गठित की हैं उसमें धरियावद की कमेटी बहुत ही हास्यस्पद सी नजर आती है।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के हस्ताक्षरों से जारी सात -सात सदस्य वाली सूची में धरियावद वाली समिति में जनजाति राज्यमंत्री अर्जुन सिंह बामनिया के अधीन जिन छह सदस्यों को शामिल किया गया हैं,उसमें सीडब्ल्यूसी(CWC) के स्थायी सदस्य रघुवीर सिंह मीणा का नाम भी शामिल हैं।
हास्यास्पद
कांग्रेस में सीडब्ल्यूसी(CWC) यानी कांग्रेस कार्यसमिति को सबसे सर्वोच्च समिति माना गया है जो पार्टी की रीति नीति का निर्धारण करती हैं। सीडब्ल्यूसी को राष्ट्रीय अध्यक्ष तक मनोनायन का अधिकार है। उस सर्वोच्च समिति के सदस्य का नाम सूची में तीसरे नम्बर पर है। दूसरे नम्बर पर खेल राज्यमंत्री अशोक चांदना है। सरकार की किसी समिति में मंत्री का नाम पहले दिया जाना तो समझ में आता है, लेकिन संगठन की ओर से गठित कमेटी में सीडब्ल्यूसी सदस्य को एक राज्यमंत्री के अधीन सदस्य बनाना और उसका नाम तीसरे नम्बर पर देना हास्यस्पद सा ही लगता हैं।
CWC की कांग्रेस में बड़ी है हैसियत
कांग्रेस संविधान के जानकारों की माने तो सीडब्ल्यूसी(CWC) की कांग्रेस में बड़ी हैसियत है। सीडब्ल्यूसी सदस्य कांग्रेस में राष्ट्रीय महामंत्री के समान माने जाते है। कांग्रेस में जिसे राष्ट्रीय महामंत्री का दायित्व सौंपा जाता है ,उसे पहले सीडब्ल्यूसी सदस्य बनाया जाता है ताकि वह नीतिगत निर्णयों में शामिल हो सके। सीडब्ल्यूसी सदस्य का मान सम्मान कांग्रेस संविधान में भी दिया गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष से भी बड़ी हैसियत वाले तथा सर्वोच्च समिति के सदस्य को एक जूनियर मंत्री के अधीन उपचुनाव की कमेटी में शामिल करने और तीसरे नम्बर पर नाम देने पर कांग्रेस की रीति-नीति के जानकार भी आश्चर्यचकित हैं।
रीति नीति को भूलती जा रही कांग्रेस
अपनी ही रीति नीति को भूलती जा रही कांग्रेस में इस तरह की घटनाएं वैसे कोई नई नहीं है। सीडब्ल्यूसी सदस्य रघुवीर सिंह मीणा के साथ ही ये तीसरा वाकया हैं। विधानसभा चुनावों के लिए बनी एक कमेटी में उन्हें सहसंयोजक बना दिया गया था,जब उन्होंने आपत्ति की तो गलती को मान लिया गया । फिर उसका रास्ता यह निकला कि रघुवीरसिंह मीणा इस कमेटी की किसी बैठक में शामिल ही नहीं हुए।
जब राहुल गांधी को कहना पड़ा
दूसरी घटना तो और भी दिलचस्प है। जयपुर के रामलीला मैदान में आयोजित सभा के आयोजन में तो स्वयं राहुल गांधी को प्रदेश के नेताओं को समझाना पड़ा कि सीडब्ल्यूसी(CWC) सदस्य का डेकोरम व प्रोटोकॉल क्या होता हैं। राहुल गांधी को जब एयरपोर्ट पर अगवानी करने वालों में मीणा नजर नहीं आये तो जिस बस में बैठकर राहुल गांधी व अन्य नेता रामलीला मैदान में पहुंचे थे उस बस में प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं और प्रभारी महासचिव को राहुल गांधी को कहना पड़ा कि प्रोटोकॉल का ध्यान रखे। आगे ऐसी गलती नहीं होनी चाहिए।
राहुल गांधी के कहने के बाद ही रामलीला मैदान में आनन फानन में मीणा के लिए अग्रिम पंक्ति में बैठने की व्यवस्था की गई थी। राहुल गांधी ने यह बात तब कही थी जब एयरपोर्ट के अंदर अगवानी करने वालों में मीणा नजर नहीं आये थे। मीणा ने एयरपोर्ट के बाहर अन्य कांग्रेसजनों के साथ लाइन में खड़े हो राहुल गांधी का स्वागत किया था,जबकि उन्हें प्रोटोकॉल के अनुसार उन्हें एयरपोर्ट के अन्दर प्रथम अगवानी करने वाले दल में शामिल होना चाहिए था।
रघुवीर मीणा के साथ ही ऐसा क्यों होता हैं
चार बार विधायक व एक बार सांसद रहे पूर्व मंत्री रघुवीर सिंह मीणा के साथ एक वाकया 2008 में भी घटित हुआ। जब वे विधानसभा के लिए निर्वाचित होकर आए तो उन्हें सरकारी उपमुख्य सचेतक बना दिया गया। राज्यमंत्री के संवैधानिक पद पर रहे मीणा को प्रथम बार निर्वाचित विधायक के अधीन पद देना उन्हें नागवार गुजरा। मीणा ने इस पद को स्वीकार ही नहीं किया। हालांकि थोड़े दिन बाद ही वे उदयपुर से लोकसभा के लिए निर्वाचित हो दिल्ली चले गए।
डोटासरा से पूछों- मीणा
सीडब्ल्यूसी(CWC) के स्थायी सदस्य रघुवीर सिंह मीणा से पूछा गया तो उनका कहना था कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ही इसका बेहतर जवाब दे सकते हैं,क्योंकि उन्होंने ही कमेटियां बनाई हैं।

