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लड़ाई आर-पार की बनाए रखने के लिए कुछ विधायकों के इस्तीफे और हो सकते हैंं?

जयपुर। कांग्रेस आलाकमान के राजस्थान के प्रति ताजा रूख को देखते हुए पायलट खेमे के कुछ और विधाायक इस्तीफा दे सकते हैं। कांग्रेस में ही रहकर आर-पार लड़ाई के मूड में पायलट खेमे की यह रणनीति है कि जिन मुद्दों को लेकर आवाज उठाई उसे किसी भी सूरत में ठंडी ना पडऩे दी जाए। दवाब की राजनीति को बरकरार रखने के लिए इस्तीफा दिलवाना एक मजबूत हथियार हो सकता हैं। हेमाराम पहले से ही इसी रणनीति के तहत इस्तीफा दिए बैठे हैं।

पाायलट खेमे को छक्काने की रणनीति

दूसरी तरफ उधर, अशोक गहलोत पाायलट खेमे को छक्काने मे लगे है ताकि पूरा खेमा ही बिखर जाए। इसमें कुछ हद तक कामयाबी भी मिली है। पंडित भंवरलाल शर्मा व बसपा विधायकों का मीडिया के सामने आना इसी रणनीति का एक हिस्सा बताया जा रहा है। पीआर मीणा व विश्वेन्द्र सिंह की बयानबाजी का नाटकीय पटाक्षेप हो ही चुका है। बसपा विधायक पायलट खेमे के खिलाफ खुलकर सामने आ ही चुके हैं।

पायलट लौटे, उनकी अगली रणनीति पर सबकी नजर

इस बीच सचिन पायलट छह दिनों की अपनी दिल्ली यात्रा के बीच आज जयपुर लौट आए। पायलट के यहां रात्रि में कौर कमेटी क्या फैसला करती है उसके बाद ही सही रणनीति का पता चलेगा।

यह हो सकता है एक नाम

जानकार सूत्रों के अनुसार पूर्व मंत्री रमेश मीणा का विधायक पद से इस्तीफा देने वालों में से एक नाम हो सकता है,क्योंकि वे पहले ही कई बार सार्वजनिक रूप से कह चुके है कि मुझे अब ये राजनीति रास नहीं आ रही। बताते है कि एक बार तो मंत्री रहते अपना त्यागपत्र लेकर मुख्यमंत्री के पास पहुंच भी गए थे। उस समय आपस में इतना विरोधाभास नहीं था,लिहाजा मुख्यमंत्री ने ही इस इस्तीफे की बात को अपने स्तर तक में ही शांत कर दिया। शाम के समय परिवार के सदस्यों के साथ भक्तिभाव मेंं लीन रहते हुए रमेश मीणा को देखा जा सकता है।

पायलट गुट की परेशानी

पायलट गुट की परेशानी यह भी है कि दो दिनों से जिस तरह की बयानबाजी चल रही है उससे उनके असली मुद्दों से भटकाया जा रहा है। उनका कहना है कि वे संगठन के लिए संघर्षरत रहे कार्यकर्ताओं को सत्ता व संगठन में उचित भागीादरी और नौकरशाहों के स्थान पर कार्यकर्ताओं को नियुक्तियों में प्राथमिकता देने की मांग कर रहे हैं। पायलट खेमे के विधायक वेदप्रकाश सोलंकी ने आज मीडिया के सामने अपनी इस बात को दोहराया भी।

प्रियंका से बात हो तब बात बने

सूत्रों की माने तो पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट दिल्ली में गांधी परिवार के अलावा अन्य किसी से दस माह हुई चर्चा पर बात करना नहीं चाहते इसीलिए उन्हेें जयपुर लौटना पड़ा। उनका प्रियंका गांधी से मिलने का कार्यक्रम था,लेकिन पहले तो प्रिंयंका शिमला गई हुई थी, फिर शायद ऐसा कोई टाइम नहीं मिलाा जिसमें सार्थक चर्चा हो सके। प्रिंयंका फिलहाल पंजाब मसले को सुलझाने मेंं लगी हुई है। पायलट की इसी सप्ताह फिर दिल्ली यात्रा हो सकती है।

सीएम ज्यादा कुछ देने को तैयार नहींं

सूत्रों ने बताया कि इस सारे घटनाक्रम में मुख्यमंत्री खेमा अपर हैण्ड माना जा रहा है और मुख्यमंत्री जिन दो मंत्रियों को मंत्रिमण्डल से बर्खास्त किया उनकी बहाली तथा कुछ एक दो बोर्ड निगमों में नियुक्ति से ज्यादा कुछ पायलट खेमे को देने को तैयार नहींं हैं। आलाकमान के सामने इस मामले मेंं उनके पास रखने को मजबूत तर्क भी है कि बसपा से आए 6 विधायको को पार्टी में शामिल करने से पहले जो आश्वासन दिया था उसे भी पूरा करना है तथा जो निर्दलीय विधायक अब तक उनके साथ डटे हुए है उन्हें भी राजी करना जरूरी है उनके पेटे ही उनकी सरकार बची हुई हैं।

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