जयपुर : रेवेन्यू बाेर्ड अजमेर में भ्रष्टाचार से जुड़े रिश्वत मामले में एसीबी ने सोमवार को कोर्ट में रेवेन्यू बोर्ड के सदस्य रहे निलंबित आरएएस सुनील कुमार शर्मा व भंवरलाल मेहरड़ा और दलाल शशिकांत जोशी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 , 7 ए 8 व 12 और आईपीसी की धारा 466, 120 में चालान पेश कर दिया।
एसीबी ने माना कि बोर्ड के दोनों सदस्य दलाल शशिकांत जोशी के जरिए बोर्ड में लंबित केसों में मनचाहा फैसला करवाने के लिए पक्षकारों से मिलीभगत कर रिश्वत प्राप्त करते थे। एसीबी ने चालान में कहा कि अनुसंधान से यह प्रमाणित है कि रेवेन्यू बोर्ड में विचाराधीन केसों की सुनवाई के दौरान पक्षकारों से शशिकांत के जरिए मिलीभगत कर कोर्ट के आदेश में बदलाव कर उसे ही पारित किया जाता था। इसके अलावा कई केसों के रिजर्व फैसलों में भी शशिकांत संबंधित पक्षकारों को रिश्वत देने के लिए प्रेरित करता था।
अनुसंधान में यह भी पाया है कि किसी मामले में बोर्ड सदस्य सुनील कुमार शर्मा ने दलाल शशिकांत जोशी से टाइपशुदा आदेश प्राप्त किया था और अगले दिन सदस्य सुनील ने उसके अनुसार ही आदेश जारी किए। इसी प्रकार सदस्य भंवरलाल मेहरड़ा के निवास पर भी लिफाफे में मिली नगद राशि से भी भ्रष्टाचार के आरोपों की पुष्टि होती है।
एसीबी को मिली थी शिकायत
दरअसल एसीबी को शिकायत मिली थी कि राजस्व संबंधी मामलों में निर्णय देने या बदलने के लिए राजस्व बोर्ड में सदस्य के तौर पर तैनात मेहरडा और सुनील कुमार शर्मा रिश्वत लेते हैं। रिश्वत लेने का सारा काम बिचौलिए अधिवक्ता शशिकांत के जरिए किया जाता है। इस पर एसीबी ने दोनों अधिकारियों के घर छापा मारकर करीब अस्सी लाख रुपए की नकदी बरामद की थी।
जांच में सामने आया कि दलाल शशिकांत मुकदमें में फैसला पक्ष में करवाने के लिए केस के पक्षकार से संपर्क करता रिश्वत राशि तय करता था। वहीं फैसला आने से पहले वह उसका मुख्य हिस्सा पहले की संबंधित पक्षकार को भेज देता था।
