जयपुर। राज्य सरकार ने बजरी के मामले में बड़ी राहत देते हुए जालौर जिले में दो एवं भीलवाड़ा जिले में एक बजरी खनन के कुल तीन खनन पट्टे जारी किए हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा बजरी की समस्या समाधान के प्रयासों और दिशा-निर्देशों से यह राह प्रशस्त हो पाई है। इसी कड़ी में पिछले दिनों राज्य में बजरी की वैकल्पिक व्यवस्था के रुप में एमसेंड पालीसी भी जारी की गई है। बजरी खनन के इन तीन पट्टों से ही प्रदेश की कुल बजारी मांग की करीब 10 प्रतिशत मांग पूरी हो सकेगी।
माइंस मंत्री प्रमोद जैन भाया ने बताया कि बजरी खनन के तीन पट्टों में से दो पट्टे जालौर के सायला एवं जालौर और तीसरा भीलवाड़ा के कोटडी में जारी किया गया है। उन्होंने बताया कि तीनों पट्टाधारकों द्वारा वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से नवीन पर्यावरण सहमति प्राप्त कर यह खनन पट्टे जारी किए गए हैं।
माइंस एवं पेट्रोलियम विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डा. सुबोध अग्रवाल ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा जारी तीन बजरी खनन पट्टों में से जालौर के सायला में रणवीर सिंह राठौड़ 3797.58 हैक्टेयर क्षेत्रफल का, जालौर में सत्यनारायण सिंह जादौन को 5269 हैक्टेयर क्षेत्रफल और भीलवाड़़ा के कोटडी में महेन्द्र सिंह राजावत को 1191.37 हैक्टेयर क्षेत्रफल के पट्टे जारी किए गए हैं। उन्होंने बताया कि सायला में 0.77 मिलियन टन, जालौर में 3.20 मिलियन टन और कोटडी भीलवाड़ा में 3.39 मिलियन टन सालाना उत्पादन क्षमता होगी। उन्होंने बताया कि इससे राज्य सरकार को 43 करोड़ रु. का सालाना राजस्व प्राप्त होगा। डा. अग्रवाल ने बताया कि एक मोटे अनुमान के अनुसार राज्य में 70 मिलियन टन बजरी की मांग है। यह तीन पट्टे जारी होने से कुल मांग की 10 फीसदी से अधिक पूर्ति हो सकेगी। यह तीनों पट्टे तत्समय जारी अवधि में से शेष रही अवधि करीब 13 माह के लिए जारी किए गए हैं।
