शारदीय नवरात्र विशेष: जालोर की पहाडिय़ों में स्थित है बिना धड़ की सुंधा माता, जानिए आस्था की कहानी
सर सुंधा धड़ कोटड़ा, पग सुंदरला री पाल। आप माता चामुण्डा इसरी, गले फूलां री माल॥इसका अर्थ है माँ का सिर सुंधा पर, धड़ कोरटे तथा पग सुंदरला में पूजे जाते हैं। मरुभूमि राजस्थान का कोसों तक फैला रेत का सुनहरा समंदर अपनी अलग ही छटा बिखेरता है। इसी अरावली पर्वतमाला की श्रृंखला में जालोर…
