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मेघवाल शांत हुए तो रोहिताश्व ने फिर खोला मोर्चा, कहा- मुझे भी धमकाकर पार्टी से निकाला गया

रोहिताश्व

जयपुर : भाजपा विधायक कैलाश मेघवाल के द्वारा नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया के खिलाफ सदन में निंदा प्रस्ताव लाने का मामला जब शीर्ष नेतृत्व के हस्तक्षेप से शांत हुआ तो पूर्व केबिनेट मंत्री डॉ. रोहिताश्व शर्मा ने नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने कहा कि कटारिया के द्वारा महाराणा प्रताप व भगवान राम के बारे में की गई टिप्पणी सचमुच निंदनीय थी। कैलाश मेघवाल ने तो कटारिया के बड़बोलेपन व अनर्गल भाषा को उजागर किया है। हाईकमान को चिट्ठी लिखकर गुलाब चंद कटारिया के बड़बोलेपन के बारे में लिखा गया तो उल्टा मेघवाल को ही पार्टी से निकालने जैसी बाते सामने आई हैं। मेरे खिलाफ भी इसी तरह की साजिश रचते हुए निष्कासित किया गया था। यह भाजपा की इंटर्नल डेमोक्रेसी के लिए बिल्कुल भी कतई ठीक नहीं है।

पार्टी के भीतर डिक्टेटरशिप खड़ी हो गई है- रोहिताश्व

रोहिताश्व ने कहा कि मैं भाजपा प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह को कहना चाहता हूं कि सीख देने वाले वरिष्ठ नेताओं की राय माननी चाहिए। कैलाश मेघवाल तब से राजनीति कर रहे हैं जब से पार्टी के प्रभारी अरुण सिंह का जन्म भी नहीं हुआ था। इन सब हालातों से जाहिर है कि पार्टी के भीतर डिक्टेटरशिप खड़ी हो गई है। जिसके भविष्य में परिणाम सही नहीं आने वाले। मैं यह भी कहता हूूं कि यह सब चलता रहा तो आगे आने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी के पक्ष में परिणाम नहीं आ पाएंगे। इसे अभी से मेरी चुनौती समझ लें।

तीन महीने पहले पार्टी से हुए निष्कासित

डॉ. रोहिताश्व शर्मा को करीब तीन महीने पहले ही पार्टी से निष्कासित किया जा चुका है। उन्होंने भी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की कार्यशैली को लेकर बयानबाजी की थी। इसके बाद उनको पार्टी से निकाल दिया गया था। लेकिन डॉ. शर्मा का साफ कहना है कि वे भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की विचारधारा को आगे बढ़ा कर कार्य करते रहेंगे। पार्टी में इंटर्नल डेमोक्रेसी को बचाए रखने के लिए उन्होंने बयान दिए थे। जो पार्टी के हित में हैं।

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