जयपुर। कांग्रेस के प्रभारी महामंत्री अजय माकन भले ही आपसी कलह को शांत करने की पहल करते हुए पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट को पार्टी का स्टार प्रचारक और एसेस्ट बता दे,लेकिन दूसरा खेमा इसे पचा नहीं पा रहा। कांग्रेस में शह और मात का खेल बंद होने का नाम ही नहीं ले रहा। पायलट खेमे के मुकाबले में बसपा से कांग्रेस में आए 6 विधायकों व 13 निर्दलीयों ने एक नया समूह गठित किया है।
हरावल दस्ते की बैठक पर सबकी नजर
इस समूह की पायलट गुट को रोकने के लिए भावी रणनीति बनाने के लिए 23 तारीख को एक पांच सितारा होटल में बैठक होगी। इस हरावल दस्ते में ये सभी मुख्यमंत्री सर्मथक विधायक है जो आलाकमान के समक्ष अपना पक्ष रख ये बताने की कोशिश करेंगे कि सरकार उनके कारण से बची हुई हैं।
अगर वे नहीं होते तो पायलट खेमा कब का ही सरकार गिरा देता। अगर निकट भविष्य में मंत्रिमण्डल विस्तार हो तो उन्हें वरीयता दी जाए। राजनीतिक नियुक्तियों में भी ये विधायक भागीदारी मांगेंगे। यानी कुल मिलाकर पायलट गुट की रणनीति को फैल कर उसे रोकने की मुख्य कवायद नजर आ रही हैं। गहलोत कैंप की तरफ से जुड़े ये विधायक ही पायलट कैंप पर निशाना साधते रहे हैं। बसपा से कांग्रेस में आए 6 विधायक पिछले दिनों ही दो बार बैठक कर चुके हैं। ये विधायक मुख्यमंत्री से मिल भी चुके है। बैठक के बाद ही विधायक संदीप यादव ने पायलट खेमे के विधायकों को गद्दार बताया था। जिस पर खूब सियासी बवाल हुआ था।
इस बार निर्दलीयों को किया जा सकता है आगे
निर्दलीय विधायकों में संयम लोढ़ा ने तो विधायकों की कार्यशाला आयोजित कर अनुशासन का पाठ पढ़ाने तक की बात भी कहीं थी। महादेव सिंह खण्डेला गहलोत ही कांग्रेस और कांग्रेस ही गहलोत कह अपनी निष्ठा आठ सिविल लाइंस के प्रति जता ही चुके हैं। सबसे मजेदार बात यह है कि 19 के इस नए समूह में से 13 निर्दलीयों पर तो कांग्रेस का अनुशासन भी लागू नही होता। इस बार का सावधानी भरा खेल निर्दलीयों को आगे करके भी खेला जा सकता है।
दूसरा बसपा के जिन 6 विधायकों को कांग्रेस में शामिल किया गया था तभी से ये उम्मीद बनी हुई है कि उन्हें इस वफादारी का मंत्री बनाकर इनाम दिया जाएगा। कांग्रेस की राजनीति में चल रही उथल-पुथल पर सबकी नजर है। 23 जून की बैठक में क्या रणनीति बनती है इस पर पायलट खेमे की भी नजर है।
