जयपुर। कांग्रेस के जिलाध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर कांग्रेस के प्रभारी महामंत्री अजय माकन ने जिला प्रभारियों को 26 जुलाई तक कार्यकारिणी घोषित करने की डेड लाइन देते हुए उनसे पैनल मांगा था। जिला प्रभारियों और प्रदेश कांग्रेस ने नाम भी दे दिए,लेकिन अगस्त की 26 तारीख आने को है पर अभी तक जिलाध्यक्षों की सूची आने की संभावना कहीं दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही। जिला और ब्लॉक स्तर पर बिना संगठन के ही कांग्रेस पंचायतीराज चुनावों में उतर गई,इसके लिए ये सफाई दी जा रही है कि पुराने वाले जिलाध्यक्ष काम कर तो रहे हैं।
इसके इतर सच्चाई यह है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के खेमों के बीच चल रही खींचतान के कारण संगठन में जिला और ब्लॉक स्तर पर अध्यक्षों की नियुक्ति अटकी पड़़ी है। प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व ने बिना ग्रासरूट संगठन के ही 13 महीने निकाल दिए हैं। हां! यह रिकॉर्ड अवश्य बन गया है।
आपको बता दे कि कांग्रेस ने पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट की बगावत के बाद 14 जुलाई को कांग्रेस की प्रदेश से लेकर जिला और ब्लॉक स्तर तक की कार्यकारिणी को भंग कर दिया था। उसके बाद 39 प्रदेश प्रदाधिकारियों की नियुक्ति तो जैसे तैसे कर दी, लेकिन जिला और ब्लॉक में नियुक्तियां अभी तक नहीं हो पाई हैं। जिला व ब्लॉक इकाईयों को जब भंग किया गया था तो यह मानकर किया गया था कि ये अधिकांश नियुक्तियां सचिन पायलट ने की हैं और इनमें से अधिकांश पायलट के इशारे पर चलेंगे। सबसे मजेदार बात यह है कि अब भी उन्हीं पदाधिकारियों से काम लेना पड़ रहा है।
पायलट कैंप के मुद्दों सुलझे तो बात बनें
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, सचिन पायलट कैंप के मुद्दे सुलझने तक कांग्रेस में ग्रासरूट स्तर की नियुक्तियां अटकी रहेंगी। मंत्रिमंडल विस्तार, राजनीतिक नियुक्तियों का उलझा पेच सुलझने तक संगठनात्मक नियुक्तियों को रणनीति के तहत रोक कर रखा गया है। पिछले दिनों प्रदेश प्रभारी अजय माकन ने कहा था कि काम प्रगति पर है। दोनों नेताओं से लगातार सभी संपर्क में हैं। माकन ने जल्द नियुक्तियों की बात कही थी, लेकिन तारीख बताने से इनकार कर दिया था।
