जयपुर। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं राजस्थान के प्रभारी अजय माकन भले ही सब कुछ अच्छा बताते घूमे पर विधायकों के बाद आज प्रदेश पदाधिकारियों का दर्द भी उनके सामने फूट पड़ा। माकन ने जब प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की मौजूदगी में पीसीसी में पार्टी पदाधिकारियों का मन टटोला तो माकन के सामने कई पदाधिकारियों ने खुलकर मंत्रियों की मनमानी और पदाधिकारियों की उपेक्षा का दर्द बयां किया। कांग्रेस पदाधिकारियों ने 100 सीटों पर हारे हुए उम्मीदवारों से चर्चा नहीं करने, हारे हुए उम्मीदवारों के काम नहीं होने, मंत्रियों के फोन नहीं उठाने और बीजेपी के लोगों को राजनीतिक नियुक्तियां देने पर सवाल उठाए।
पदाधिकारियों ने सवाल उठाये
पायलट समर्थक कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष राजेंद्र चौधरी और वेद सोलंकी ने कहा- जिन 100 सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवार हारे हुए हैं, उनसे चर्चा किए बिना फीडबैक पूरा नहीं हो सकता। उनकी भी राय लेनी चाहिए। वेद प्रकाश सोलंकी को अजय माकन ने फीडबैक की बात सार्वजनिक करने पर टोकते हुए कहा कि इस मुद्दे पर हमारी व्यक्तिगत बात हुई थी। आपने बाहर जाकर उसे सार्वजनिक कर दिया। यह कहकर सोलंकी को बैठा दिया पर उपाध्यक्ष राजेंद्र चौधरी नहीं रुके और बोले स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने कोरोना काल में फोन नहीं उठाए। चौधरी ने कहा, कोरोना काल में सरकार ने एक बार केवल सरकारी अस्पतालों में भर्ती रोगियों को ही रेमडेसिविर इंजेक्शन देने का प्रावधान कर दिया।
प्राइवेट अस्पतालों में बने कोविड सेंटर्स में भर्ती रोगियों को इंजेक्शन नहीं दे रहे थे। बीजेपी इसको मुद्दा बना लेती। मैंने इस व्यवस्था को बदलवाने के लिए स्वास्थ्य मंत्री को कई बार फोन किए। वह कभी फोन पर नहीं आए। बाद में प्रदेशाध्यक्ष डोटासरा को दिक्कत बताई। उनके हस्तक्षेप से प्रावधान बदला।
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हारे हुए बोले हमारे कहने से कोई काम नहीं हो रहा
प्रदेश सचिव महेंद्र गुर्जर और शोभा सोलंकी ने कांग्रेस का राज होने के बावजूद काम नहीं होने पर सवाल उठाए। नसीराबाद से विधायक रह चुके महेंद्र गुर्जर ने कहा, हमारे कहने से सरकार में कोई काम नहीं हो रहा है। पार्टी पदाधिकारी भी हूं और हारा हुआ उम्मीदवार भी। हमारी कोई पूछ नहीं है। प्रदेश सचिव शोभा सोलंकी ने कहा- हमारे कहने से ट्रांसफर-पोस्टिंग नहीं हो रहे हैं। विकास के कामों में भी हमारी नहीं चल रही है। इस व्यवस्था में बदलाव होना चाहिए।
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माकन ने कहा- राज्य सरकार के पास राजस्व का कोई जरिया नहीं
बैठक में एक पदाधिकारी ने कहा कि हम बार-बार महंगे पेट्रोल-डीजल पर आंदोलन करते हैं ,लेकिन सबसे ज्यादा वैट भी राजस्थान में है। पहले राजस्थान सरकार तो वैट कम करे। इस पर अजय माकन ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि राज्य सरकार के पास राजस्व का कोई जरिया नहीं है। हमारी मांग पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने की है।
पूर्व मंत्री मांगीलाल गरासिया ने कहा- हम पदाधिकारी ग्राउंड पर असहाय महसूस कर रहे हैं। प्रदेश पदाधिकारी तो बना दिए, लेकिन न जिलाध्यक्ष बनाए और न ब्लॉक अध्यक्ष। इससे संगठन का काम ठप पड़ा है।
